
211वीं बटालियन की पहल से पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे युवक-युवतियों को मिल रहा मार्गदर्शन, मछली पालन से कंप्यूटर शिक्षा तक प्रशिक्षण देने की योजना
अमलीपदर । कभी नक्सली गतिविधियों के कारण पहचाने जाने वाले मैनपुर क्षेत्र में अब युवाओं के भविष्य को नई दिशा देने की कोशिशें हो रही हैं। सुरक्षा और शांति के साथ क्षेत्र के नौजवानों को रोजगार से जोड़ने की पहल भी शुरू हो गई है। इसी कड़ी में सीआरपीएफ की 211वीं बटालियन स्थानीय युवक-युवतियों को पुलिस भर्ती के लिए तैयार करने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है।
इस पहल का उद्देश्य युवाओं को केवल सरकारी नौकरी की तैयारी तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसे हुनर से भी जोड़ना है, जिनके सहारे वे अपने गांव और क्षेत्र में रहकर रोजगार के अवसर तलाश सकें। पुलिस भर्ती की तैयारी के लिए शारीरिक अभ्यास और लिखित परीक्षा का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न रोजगारमूलक प्रशिक्षण शुरू करने की योजना बनाई गई है।
सुबह मैदान में अभ्यास, फिर कक्षा में पढ़ाई

सीआरपीएफ के जवान युवाओं को पुलिस भर्ती की निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप तैयारी कराने में जुटे हैं। जुगाड़ और इंदागांव क्षेत्र में संचालित इस प्रशिक्षण के दौरान अभ्यर्थियों को शारीरिक दक्षता बढ़ाने के साथ लिखित परीक्षा की तैयारी भी कराई जा रही है।
प्रशिक्षण का कार्यक्रम सुबह 8 बजे से शुरू होता है। शुरुआती दो घंटे शारीरिक अभ्यास के लिए निर्धारित हैं। इसके बाद नाश्ते और थोड़े विश्राम का समय दिया जाता है। फिर अभ्यर्थियों को कक्षा में बैठाकर लिखित परीक्षा की तैयारी कराई जाती है।
इस व्यवस्था के माध्यम से युवाओं को नियमित दिनचर्या, अनुशासन और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आवश्यक तैयारी का अवसर मिल रहा है। दूरस्थ गांवों में रहने वाले उन युवाओं के लिए यह पहल खास मायने रखती है, जिन्हें भर्ती की तैयारी के लिए बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है।
26 युवाओं ने दिखाई रुचि, 14 अभ्यर्थी नियमित
जुगाड़ कैंप में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में अब तक करीब 26 अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया है। इनमें से 14 युवक-युवतियां नियमित रूप से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। महिला अभ्यर्थी सरस्वती कश्यप भी पुलिस भर्ती की तैयारी में जुटी हैं।
सरस्वती सहित अन्य अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि नियमित अभ्यास और सीआरपीएफ के जवानों से मिलने वाले मार्गदर्शन से उन्हें भर्ती प्रक्रिया में बेहतर प्रदर्शन करने का अवसर मिलेगा। प्रशिक्षण के जरिए वे अपनी शारीरिक क्षमता बढ़ाने और लिखित परीक्षा की तैयारी मजबूत करने में लगे हैं।
स्थानीय स्तर पर ऐसी सुविधा उपलब्ध होने से अभ्यर्थियों को अपने क्षेत्र में ही तैयारी करने का अवसर मिल रहा है। इससे समय और आवागमन की परेशानी कम होने के साथ अनुभवी जवानों से सीधे मार्गदर्शन भी मिल पा रहा है।
एक महीने के प्रशिक्षण से चयन की उम्मीद
प्रशिक्षण कार्यक्रम में सब-इंस्पेक्टर रणजीत सिंह और संजय कुमार पांडेय अभ्यर्थियों को शारीरिक अभ्यास तथा लिखित परीक्षा की तैयारी करा रहे हैं। प्रशिक्षण से जुड़े अधिकारियों को उम्मीद है कि मेहनत और नियमित अभ्यास के परिणामस्वरूप करीब पांच से छह अभ्यर्थी पुलिस भर्ती प्रक्रिया में सफलता हासिल कर सकते हैं।
हालांकि, अभ्यर्थियों का अंतिम चयन संबंधित भर्ती प्रक्रिया, पात्रता और निर्धारित मानकों के आधार पर ही होगा।
कंपनी कमांडर निरंजन कुमार ने क्षेत्र के युवक-युवतियों से इस अवसर का लाभ उठाने की अपील की है। इच्छुक अभ्यर्थी जुगाड़ कैंप पहुंचकर उनसे मुलाकात कर सकते हैं और प्रशिक्षण से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
नौकरी की तैयारी के साथ स्वरोजगार पर भी जोर
सीआरपीएफ की योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू युवाओं को वैकल्पिक रोजगार के लिए तैयार करना भी है। इसके तहत मछली पालन, मुर्गी पालन, सिलाई, मधुमक्खी पालन और कंप्यूटर शिक्षा जैसे प्रशिक्षण शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
इन प्रशिक्षणों के माध्यम से युवाओं को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार काम सीखने का अवसर देने की योजना है। इसका लाभ उन युवाओं को भी मिल सकता है, जो किसी कारणवश सरकारी नौकरी में चयनित नहीं हो पाते और अपने स्तर पर रोजगार शुरू करना चाहते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन, मत्स्य पालन और अन्य छोटे व्यवसाय आजीविका के महत्वपूर्ण साधन बन सकते हैं। ऐसे में यदि युवाओं को प्रशिक्षण के साथ तकनीकी सहायता, जरूरी संसाधन और बाजार तक पहुंच उपलब्ध होती है, तो स्वरोजगार की संभावनाओं को और मजबूत किया जा सकता है।
शांति के साथ युवाओं को अवसर देना भी जरूरी
मैनपुर जैसे दूरस्थ क्षेत्र में शांति और विकास को स्थायी बनाने के लिए युवाओं को शिक्षा, कौशल और रोजगार के अवसरों से जोड़ना महत्वपूर्ण है। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के साथ यदि स्थानीय नौजवानों को आगे बढ़ने के रास्ते मिलते हैं, तो इसका सकारात्मक असर परिवारों और पूरे समाज पर पड़ सकता है।
सीआरपीएफ की 211वीं बटालियन की यह पहल इसी दिशा में एक प्रयास के रूप में देखी जा रही है। एक ओर युवाओं को पुलिस भर्ती के लिए तैयार किया जा रहा है, तो दूसरी ओर उन्हें रोजगारमूलक कौशल से जोड़ने की योजना भी बनाई गई है।
हालांकि, इस पहल की वास्तविक सफलता प्रशिक्षण कार्यक्रमों के नियमित संचालन, अधिक से अधिक युवाओं की भागीदारी और प्रशिक्षण के बाद उन्हें रोजगार अथवा स्वरोजगार से जोड़ने पर निर्भर करेगी।
अब उम्मीद यही है कि क्षेत्र के युवाओं को अपनी प्रतिभा साबित करने के लिए दूर शहरों पर निर्भर न रहना पड़े। उन्हें अपने ही इलाके में सीखने, आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने के पर्याप्त अवसर मिलें। जंगलों में कायम होती शांति के बीच यदि युवाओं को रोजगार और बेहतर भविष्य का रास्ता मिलता है, तो यह बदलाव क्षेत्र के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।


