Dharohar

बड़ा दिगंबर जैन मंदिर धर्म, संस्कृति और भव्यता की 800 वर्ष पुरानी धरोहर है

2020-10-27 19:00:20 admin
विदिशा. धर्म, संस्कृति और भव्यता की 800 वर्ष पुरानी विरासत विदिशा में आज भी शान से सिर उठाए मौजूद है। किले अंदर स्थित श्रीशीतलनाथ दिगंबर बड़ा जैन बाहर से भले ही अपनी विशालता और भव्यता का जलवा बिखेरता नजर न आता हो, लेकिन परिसर में कदम रखते ही अपनी धरोहर पर यकीनन गर्व होता है। विशाल परिसर, भव्य इमारत, मोहक नक्काशी, छत पर सोने की कारीगरी, हजारों प्रतिमाएं, मुनिश्री की दुर्लभ प्रतिमा और तीर्थंकरों की चौबीसी सब दिव्यता लिए नजर आती है। मंदिर ट्रस्ट के पिछले 40 वर्ष से अध्यक्ष मलूक चंद जैन बताते हैं कि जो दिखता है वैसा नहीं बल्कि उससे भी कहीं अधिक है इस मंदिर में। नीचे तलघर है, जो सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया गया है। मुगल शासक औरंगजेब के समय जब प्रतिमाओं और मंदिरों को नुकसान पहुंचाया जा रहा था, तब इसी तलघर में देव प्रतिमाएं छिपाई गईं थीं। भगवान पाŸवनाथ की एक प्रतिमा के सीने पर आतातायियों ने छैनी से तोडऩे की कोशिश की थी, लेकिन वे ऐसा कर नहीं सके। छैनी के निशान अभी भी प्रतिमा के सीने पर हैं।
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अयोध्या में मिले पुरावशेष पर रार, लोगों ने कहा- सम्राट अशोक के समय के हैं अंश

2020-10-27 18:00:32 admin


अयोध्या में राम मंदिर निर्माण समतलीकरण के दौरान मिली मूर्तियों से विवाद पैदा हो गया है। मूर्तियों के अवशेष मिलने पर बयानबाजी के बीच माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर हैशटैग बौद्धस्थल अयोध्या ट्रेंड कर रहा है। यहां कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि समतलीकरण के दौरान जो अवशेष मिले हैं वह सम्राट अशोक के शासनकाल के दौरान की है। कुछ ट्विटर यूजर ने यूनेस्को से रामजन्मभूमि परिसर की निष्पक्ष खुदाई की मांग की है।
लोगों का कहना है कि समतलीकरण के दौरान खुदाई में जो अवशेष मिले हैं वह शिवलिंग नहीं बल्कि बौद्ध स्तंभ हैं। इसी के साथ लोग ट्विटर पर बौद्ध धर्म की कलाकृतियां और समतलीकरण के दौरान मिले अवशेष की तस्वीर साझा कर तुलना कर रहे हैं। इससे पहले ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल के महासचिव खालिक अहमद खान ने दावा किया था कि जो अवशेष मिले हैं, वे बौद्ध धर्म से जुड़े हुए हैं।

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हाथरस केस की निगरानी अब इलाहाबाद HC करेगा

2020-10-27 10:05:29 admin


समाचार युग – हाथरस मामले पर SC का फैसला,कोर्ट को रिपोर्ट करेगी CBI . हाथरस मामले की निगरानी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज अहम फैसला सुनाया. उच्चतम न्यायलय के अनुसार CBI जांच की मॉनिटरिंग हाईकोर्ट करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले की जांच के बाद कोर्ट तय करेगा कि केस का ट्रान्सफर उत्तर प्रदेश से दिल्ली किया जाए या नही. इसके अलावा पीड़ितों व गवाहों की सुरक्षा पर भी हाईकोर्ट ध्यान देगा. कोर्ट के अनुसार CBI हाईकोर्ट को रिपोर्ट करेगी. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में पीड़ित परिवार ने अपील की थी कि इस मामले का ट्रायल दिल्ली में हो.

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दूध में मौजूद लैक्टिक अम्ल खींचता है किरणों से शक्ति

2020-10-26 08:06:39 admin


पंचांग के अनुसार अश्विन माह के शुरुआत से कार्तिक महीने के अंत तक शरद ऋतु रहती है । इस ऋतु में 2 पर्णिमा पड़ती है । इनमें आश्विन माह की पूर्णिमा महत्वपूर्ण मानी गयी है , इसे ही शरद पुर्णिमा कहा जाता है । इस पुर्णिमा पर चावल और दूध से बनी खीर को चाँदी के बर्तन में रात में रखकर सेवन किया जाता । इससे रोग खत्म हो जाते है और रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है । श्रीमद्भगवत महापुराण के अनुसार चंद्रमा को औषधि का देवता माना जाता है । मान्यताओं से अलग वैज्ञानिकों ने भी इस पूर्णिमा को खास बताया है।

क्या है लैक्टिक अम्ल

लैक्टिक अम्ल (Lactic acid) विभिन्न जैवरासायनिक प्रक्रमों में प्रमुख भूमिका निभाने वाला एक रासायनिक यौगिक है। इसे सर्वप्रथम स्वीडेन के रसायनविज्ञानी कार्ल विल्हेल्म शीले ने १७८० में विलगित (isolate) किया था। लैक्टिक अम्ल एक कार्बोक्सिलिक अम्ल है जिसका अणुसूत्र C3H6O3 है। मांसपेशियों मैं इसी अम्ल के एकत्रित हो जाने के कारण ही थकावट पैदा होती है। अगर आपको थकावट महसूस हो रही है तो ताजे ठंडे पानी से नहाने से ये अम्ल टुकड़ो में विभाजित हो जाता है जिससे कि आपको होने वाली थकावट कम हो जाएगी और आप पहले से काफी अच्छा महसूस करेगे | ग्लूकोस बिना ऑक्सीजन की उपस्थिति में मांसपेशियों से प्रतिक्रिया कर लैक्टिक अम्ल बनाता है

वैज्ञानिक महत्व
शरद पूर्णिमा को चंद्रमा प्रथ्वी सबसे निकट होता है , जिससे चंद्रमा के प्रकाश की किरणें प्रथ्वी पर स्वास्थय की बौछारें करती हैं । इस दिन चंद्रमा की किरणों में विशेष प्रकार के लवण व विटामिन होते है । वैज्ञानिकों के अनुसार दूध में लैक्टिक अम्ल होता यह तत्व किरणों से अधिक मात्रा में शक्ति का शोषण करता है , चावल में चावल में स्टार्च होने के कारण यह प्रक्रिया और भी आसान हो जाती है । इसी कारण ऋषिमुनियों ने शरद पूर्णिमा की रात्रि में खीर खुले आसमान में रखने का विधान किया है औरिस खीर का सेवन सेहत के किए महतावपूर्ण बताया है । इससे पुनरयौवन , शक्ति और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है । चाँदी के बर्तन में सेवन करने के पीछे भी वैज्ञानिक कारण है । शोध के अनुसार चाँदी में प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है । इससे विषाणु दूर रहते हैं ।

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ब्रिटेन में कोरोना की दूसरी लहर से तबाही

2020-10-24 10:49:29 admin


लंदन
ब्रिटेन में कोरोना वायरस के मामलों में फिर से आई तेजी के बीच कई शहरों में सख्त लॉकडाउन का ऐलान किया गया है। ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस ने भी कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए संक्रमण को काबू करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। वेल्स, ग्रेटर मैनचेस्टर, लिवरपूल सिटी, लंकाशायर, साउथ यॉर्कशायर और स्कॉर्टलैंड में लोगों को बाहर निकलने पर भी रोक लगा दी गई है

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