पालघर हत्याकांड : रिश्ता क्या कहलाता है?

ये रिश्ता क्या कहलाता है?
पालघर में साधुओं जी हत्या में जिन लोगो को स्थानीय पुलिस ने गिरफ्तार किया है, उनकी जमानत के प्रयास होने लगे है और यह प्रयास शिराज बलसारा कर रही है जो एक एनजीओ काश्तकारी संघटन की प्रमुख है। जिनके पति का नाम प्रदीप प्रभु है और यह एनजीओ उसी ने ही बनाई थी। नाम से हिन्दू लगता है लेकिन यह इस पूरे घटनाक्रम का महत्वपूर्ण कड़ी है क्योंकि यह कोई साधारण व्यक्ति नही है। यह प्रदीप प्रभु, पहले टाटा इंस्टीटूट ऑफ सोशल साइंस में पढ़ाता था और उसका असली नाम पीटर डेमिलो है। इसने यह प्रदीप प्रभु नाम, हिंदुओं की आंखों में धूल झोंकने के लिए रक्खा है। यह व्यक्ति कितना शक्तिशाली है यह इसी से पता चलता है कि यह, यूपीए सरकार में सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली नेशनल एडवाइजरी कमेटी का सदस्य था। यूपीए काल के कई कानूनों के ड्राफ्ट इसी के बनाये हुये है, आईएएस/आईएफएस के कोर्स में इसके लेक्चर्स अनिवार्य थे और साथ मे यूपीए सरकार के 10 वर्षीय कार्यकाल में यह भारत सरकार की कई समितियों का सदस्य भी था। संक्षेप में आप यह समझ सकते है कि सोनिया गांधी के शासनकाल में यह प्रदीप प्रभु उर्फ पीटर डेमिलो, एनजीओ चलाने वालो में सबसे सशक्त व्यक्ति था। आज जब पूरे भारत का हिन्दू ,पालघर में साधुओं के हत्यारों की असलियत जानने में लगा हुआ है तब उनके हत्यारों को बचाने प्रदीप प्रभु उर्फ पीटर डेमिलो की पत्नी शिराज बलसारा सामने आगयी है। यह जो दिख रहा है वह सिर्फ एक चेहरा नही है बल्कि एक पूरा तंत्र है, जो धर्मांतरण कराने वाले ईसाई गिरोह और क्रिप्टो ईसाइयों से जुड़ता हुआ सीधे दिल्ली में सोनिया गांधी तक पहुंचता है।

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