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सिंहस्थ स्पेशल

2016-04-20 06:00:49 admin

 

simhasth-2016-peshwai

पेशवाई

अग्नि अखाडा : सुबह १० बजे : देवास गेट सख्याराजे धर्मशाला से मेला छावनी तक

बाडा उदासीन : सुबह १० बजे : शिवाजी पार्क अलखधाम से मेला छावनी तक

फ्री बीके राइड कर सकेंगे 

सिंहस्थ में पहली बार धार्मिक स्थलों पर जाने के लिए फ्री बीके सर्विस "बिके फॉर राइड " संस्था उपलब्ध कराएगी | कुछ युवाओ द्वारा इस सेवा से प्रमुख मंदिर , दत्त अखाडा जोन , महाकाल जोन , मंगल नाथ जोन, काल भेरव जोन जोड़े जायेगे |

आरोप, प्रत्यारोप, शिकायतें एवं समाचार कृपया इस ईमेल samacharyug@gmail.com पर भेजें। यदि आप अपना SYC-Logo-300x1301नाम गोपनीय रखना चाहते हैं तो कृपया स्पष्ट उल्लेख करें। आप हमें 8989210490 पर whatsapp भी कर सकते हैं। अपनी प्रतिक्रियाएं कृपया नीचे दर्ज करें।

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इन मंत्रों का करें जप अगर पाना चाहते है भगवान विष्णु की कृपा

2015-04-16 03:57:08 admin
अभी वैशाख माह (4 मई तक) चल रहा है और इस माह में भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है। इन दिनों में सुबह और शाम, दोनों समय स्नान के बाद किसी मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति को जल स्नान, पंचामृत (दूध, दही, शक्कर, शहद व घी) स्नान कराएं। स्नान के बाद विशेष रूप से पीले Vishnu Jiरंगे की पूजन सामग्रियां अर्पित करें।
पूजन सामग्रियों में केसरिया चंदन, पीले फूल, पीला वस्त्र, पीले फल, पीले पकवान शामिल करना चाहिए। इसके बाद चंदन धूप जलाकर भगवान विष्णु के विशेष मंत्रों का जप करना चाहिए। मंत्र जप के लिए तुलसी या चंदन की माला का उपयोग करें। मंत्र जप की संख्या कम से कम 108 होनी चाहिए। इसके बाद आरती करें।
मंत्र 1. ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय।
मंत्र 2. ऊँ नमो नारायणाय नम:।
मंत्र 3. त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव, त्वमेव विद्या, द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं ममः देवदेवा।।
मंत्र 4. शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्। विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाड्गंम् लक्ष्मीकातं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यंम्र्। वन्दे विष्णु भवभयहरं सर्वलोकैक नाथम्।।
मंत्र 5. ऊँ नमो नारायणाय नम:

इन पांच मंत्रों में से किसी भी मंत्र का जप किया जा सकता है। इनके जप से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं।

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मंगलवार को ये 3 उपाय मंगलकामना के साथ करें

2014-12-30 09:17:35 admin

शास्त्रों के अनुसार मंगलवार को ही बजरंग बली का जन्म हुआ है। यही कारण है मंगलवार के दिन बजरंगबली की पूजा आराधना सच्चे मन से की जाए तो यह जल्दी ही शुभ फल प्रदान करते हैं।

यहां आपको ऐसे तीन उपाय बताए जा रहे हैं जिन्हें आजमाकर आप हनुमानजी से इच्छित वर की प्राप्ति के लिए वर मांग सकते हैं।

पहला उपाय

किसी भी हनुमान मंदिर में अपने साथ एक नींबू और 4 लौंग लेकर जाएं। इसके बाद मंदिर में हनुमानजी के सामने नींबू के ऊपर चारों लौंग अर्पित करें। फिर हनुमान चालीसा का पाठ करें या हनुमानजी के मंत्रों का जप करें। मंत्र जप के बाद हनुमानजी से सफलता की कामना करें और इस नींबू को अपने साथ ही रख लें। नींबू के प्रभाव से आपके कार्य में सफलता मिलने की संभावनाएं काफी बढ़ जाएंगी।

दूसरा उपाय

एक नारियल लेकर किसी हनुमान मंदिर जाएं। मंदिर में हनुमानजी की प्रतिमा के सामने नारियल को अपने सिर पर से सात बार वार लें। इसके साथ हनुमान चालीसा का जप करते रहें। सिर पर नारियल वारने के बाद इसे हनुमानजी के सामने फोड़ दें। इस उपाय से आपकी सभी बाधाएं दूर हो जाएंगी।

नोटः इस उपाय को अकेले में करें और उपाय के संबंध में किसी अन्य व्यक्ति से चर्चा न करें। हनुमान जयंती पर इस उपाय के साथ ही बजरंग बली को पुष्प-हार और प्रसाद भी अर्पित करें।

तीसरा उपाय

आपको हर रात हनुमानजी के सामने एक विशेष दीपक जलाना है। रात में किसी हनुमान मंदिर जाएं और वहां प्रतिमा के सामने में चौमुखा दीपक लगाएं। चौमुखा दीपक यानी दीपक चारों ओर से जलाना है। इसके साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ करें। ऐसा प्रतिदिन करेंगे तो बहुत ही जल्द बड़ी-बड़ी परेशानियां भी आसानी से दूर हो जाएंगी।

इनको भी आजमाएPanchmukhi_hanuman_hd_wallpaper

  • हनुमानजी को सिंदूर और तेल अर्पित करें। जिस प्रकार विवाहित स्त्रियां अपने पति या स्वामी की लंबी उम्र के लिए मांग में सिंदूर लगाती हैं, ठीक उसी प्रकार हनुमानजी भी अपने स्वामी श्रीराम के लिए पूरे शरीर पर सिंदूर लगाते हैं। जो भी व्यक्ति हनुमानजी को सिंदूर अर्पित करता है, उसकी सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं।
  • यदि आप सभी प्रकार की परेशानियों से मुक्ति चाहते हैं तो हनुमानजी के मंदिर जाएं और अपने साथ एक नारियल लेकर जाएं। मंदिर पहुंचकर हनुमानजी की प्रतिमा के सामने नारियल पर स्वस्तिक बनाएं और हनुमानजी को अर्पित करें। इसके साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ करें। इस उपाय से जल्दी ही शुभ फल प्राप्त होते हैं।
  • किसी पीपल पेड़ में जल चढ़ाएं। इसके बाद सात बार पीपल की परिक्रमा करें। परिक्रमा पूर्ण होने पर पीपल के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें।
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श्रद्धालुओं को आकर्षित करेंगी धार्मिक संस्थाएं

2014-12-24 05:47:21 admin

इलाहाबाद। सनातन धर्म की धार्मिक व सांस्कृतिक विरासत को संजोने वाले माघ मेला में हर जगह श्रद्धालुओं को कुछ खास नजर आएगा। चार सेक्टर व 15 सौ बीघा में बस रहे मेला में दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं को योग, ध्यान के साथ गाय, गंगा की रक्षा, स्वदेशी अपनाने की सीख भी मिलेगी। परेड ग्राउंड में जहां खादी ग्रामोद्योग और गंगा प्रदूषण मुक्ति सहित दो दर्जन से अधिक शिविर लगेंगे। वहीं सेक्टर दो और तीन आकर्षण का केंद्र रहेंगे।

 

मेला क्षेत्र के सेक्टर दो में साढ़े तीन सौ और सेक्टर तीन में पांच सौ बीघा में मेला बस रहा है। मेला प्रशासन के मुताबिक त्रिवेणी मार्ग के एक ओर सेक्टर दो में जगद्गुरु वासुदेवानंद सरस्वती, जगद्गुरु स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती, वाहे गुरु, रमेश तांत्रिक, क्रियायोग अनुसंधान संस्थान, धर्म संघ, शंकर चैतन्य समेत विभिन्न धार्मिक संस्थाओं के शिविर लग रहे हैं। वहीं सेक्टर दो में गंगा प्रदूषण नियंत्रण प्रदर्शनी का आयोजन करेगी। इसी सेक्टर में बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के शिविर भी होंगे।

सेक्टर तीन में शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती, प्रबलजी महाराज, शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती, स्वामी अधोक्षजानंद और खाक चौक के संतों के शिविर लग रहे हैं। इन शिविरों में सुबह से लेकर रात तक कथा, प्रवचन, रासलीला व योग की कक्षाएं चलेंगी।

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वास्तु के हिसाब से सजाएं घर

2014-12-20 05:59:23 admin

शहरों में बढ़ती हुई आबादी और जगह की कमी की वजह से वास्तुशास्त्रोक्त भूमि तथा भवन का प्राप्त होना लगभग असंभव-सा होता जा रहा है। शहरों में विकास प्राधिकरणों द्वारा दिए जा रहे प्लॉट या फ्लैट पूरी तरह से वास्तु के अनुसार नहीं होते हैं। इन प्लॉटों या फ्लैटों में वास्तुशास्त्रोक्त सभी कक्षों का निर्माण भी सम्भव नहीं होता है। अतः न्यूनतम कक्षों में भी वास्तुशास्त्रीय दृष्टि से लाभ प्राप्त करने के लिए गृह की आंतरिक सज्जा में किस कक्ष में क्या व्यवस्था होनी चाहिए, इसका विवेचनवास्तुविद् डॉ. एस. सी मिश्रा निम्नलिखित रूप से कर रहे हैं…



मुख्य द्वार : घर के मुख्य द्वार पर मांगलिक चिन्हों जैसे – ऊँ, स्वास्तिक का प्रयोग करना चाहिए। घर में मुख्य द्वार जैसे अन्य द्वार नहीं बनाने चाहिए तथा मुख्य द्वार को फल, पत्र, लता आदि के चित्रों से अलंकृत करना चाहिए। बृहदवास्तुमाला में कहा गया है…मूलद्वारं नान्यैद्वारैरभिसन्दधीत रूपद्धर्या। घटफलपत्रप्रथमादिभिश्च तन्मंगलैश्चिनुयात्॥ इसी प्रकार मुख्य द्वार पर कभी भी वीभत्स चित्र इत्यादि नहीं लगाने चाहिए।



बैठक कक्ष या ड्राइंग रूम : घर का यह कमरा अत्यंत महत्वपर्ण है। इस कक्ष में फर्नीचर, शो केस तथा अन्य भारी वस्तुएं दक्षिण-पश्चिम या नैऋत्य में रखनी चाहिए। फर्नीचर रखते समय इस बात का ध्यान रखे कि घर का मालिक बैठते समय पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठे। इस कक्ष में यदि कृत्रिम पानी का फव्वारा या अक्वेरियम रखना हो तो उसे उत्तर-पूर्व कोण में रखना चाहिए। टीवी दक्षिण-पश्चिम या अग्नि कोण में रखा जा सकता है। बैठक में ही मृत पूर्वजों के चित्र दक्षिण या पश्चिमी दीवार पर लगाना चाहिए। इस कक्ष की दीवारों का हल्का नीला, आसमानी, पीला, क्रीम या हरे रंग का होना उत्तम होता है।

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धर्मांतरण के मुद्दे पर राज्यसभा में बवाल जारी

2014-12-18 10:39:00 admin

नई दिल्ली। राज्यसभा में भारी हंगामे के बाद आज धर्म परिवर्तन के मुद्दे पर चर्चा शुरू हो गई है। आज पीएम के राज्यसभा पहुंचते ही कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि पीएम ने संसदीय दल की बैठक में अपने सांसदों को लक्ष्मण रेखा न लांघने की नसीहत दी थी फिर भी उनके नेता आखिर आए दिन क्यों विवादित बयान दे रहे हैं।

 

वहीं वित्तमंत्री अरुण जेटली ने आनंद शर्मा को जवाब देते हुए कहा कि पीएम इससे पहले भी एक बयान पर सफाई दे चुके हैं, लेकिन उसके बावजूद विपक्ष का हंगामा नहीं रूका। जेटली ने कहा कि सदन में चर्चा कैसे हो ये विपक्ष तय कर रहा है। जेटली के बयान पर शर्मा ने पीएम पर तंज करते हुए कहा कि पीएम अच्छे वक्ता हैं उन्हें आपके वैशाखियों की जरूरत नहीं है। उन्हें खुद बोलने दिया जाए।

 

वहीं बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने कहा कि धर्म परिवर्तन का मुद्दा काफी बड़ा मुुद्दा है। पीएम को ऐसे लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए तभी ऐसे मामले रुकेंगे। ये काफी महत्वपूर्ण मुद्दा है। देशहित में पीएम को जवाब देना होगा। सीपीआई नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि आज पीएम जी राज्यसभा में आए हैं और अगर वो हमें सुन लेगें तो अच्छी बात होगी।

 

इससे पहले आज विपक्ष के भारी हंगामे के बाद पीएम राज्यसभा पहुंचे। आज सत्र शुरू होते ही धर्मांतरण के मुद्दे पर सांसदों का हंगामा शुरू हो गया। राज्यसभा में आज पीएम मोदी के नहीं आने पर विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया था।

 

जेडीयू नेता शरद यादव ने कहा कि आखिर पीएम सदन में आकर धर्मांतरण के मुद्दे पर बयान क्यों नहीं देते आखिर उन्होंने इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न क्यों बना लिया है। भारी हंगामे के बाद प्रधानमंत्री राज्यसभा पहुंचे। गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से पीएम के जवाब की मांग को लेकर विपक्ष सदन नहीं चलने दे रहा है।

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रामपाल की बहन भी हुई गिरफ्तार

2014-12-17 05:55:57 admin

रामपाल की बहन और दो महिलाओं सहित चार अन्य लोगों को हिसार में गिरफ्तार किया गया है । इन लोगों को पिछले महीने रामपाल के समर्थकों एवं पुलिस के बीच गतिरोध के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है जिस दौरान पांच महिलाओं एवं एक बच्चाे की मौत हो गई थी । बरवाला के एसएचओ अनिल कुमार ने पीटीआई को फोन पर बताया कि रामपाल की बहन राजकला और उसकी दो सहयोगियों सावित्री और पूनम को शनिवार को तब गिरफ्तार किया गया जब वे रामपाल से मिलने आई थीं जो हिसार में न्यायिक हिरासत में बंद है । तीनों महिलाओं को अदालत में पेश किया गया जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है । उन्होंने कहा कि दो अन्य रामफल और देसराज को कल तब गिरफ्तार किया गया जब वे जेल परिसर के आसपास घूम रहे थे । कुमार ने कहा कि जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है उनके नाम रामपाल के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों में शामिल हैं । उनके खिलाफ आरोपों में अवैध रूप से इकटठा होना और देशद्रोह शामिल है । एसएचओ ने कहा, पुलिस के पास उपलब्ध साक्ष्यों से पता चलता है कि राजकला ने रामपाल के कहने पर महिलाओं और बच्चाों को आश्रम में बंधक बनाया था ताकि बरवाला में पुलिस अभियान को विफल किया जा सके । उन्होंने कहा, आश्रम से जब्त कुछ हथियार देसराज के नाम पर हैं । 63 वर्षीय रामपाल को उनके समर्थकों और पुलिस के बीच गतिरोध पैदा होने पर करीब 15 हजार अनुयायियों को उनके आश्रम से निकालने के बाद 19 नवम्बर को गिरफ्तार किया गया था । 

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धर्म जागरण समिति ने अलीगढ़ में 25 दिसंबर को तय धर्मांतरण कार्यक्रम को किया रद्द

2014-12-17 05:24:44 admin

अलीगढ़ : धर्मांतरण कार्यक्रम को लेकर बढ़ते विवाद के बीच हिंदू संगठन धर्म जागरण समिति ने इस मामले में दबाव को देख अब अपना निर्णय बदल लिया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हिन्दुत्व समूह धर्म जागरण समिति ने 25 दिसंबर को तय अपना विवादित धर्मांतरण कार्यक्रम रद्द कर दिया है, जिसके साथ इस मुद्दे पर कई दिनों से जारी गतिरोध खत्म हो गया।

संगठन के जिलाध्यक्ष सत्यप्रकाश नौमान ने कहा कि 25 दिसंबर को तय प्रस्तावित ‘घर वापसी’ (धर्मांतरण समारोह) रद्द कर दिया गया है। उन्होंने हालांकि संगठन के अपने रूख से पलट जाने का कारण स्पष्ट नहीं किया। संगठन ने क्रिसमस के दिन 25 दिसंबर को एक स्थानीय कॉलेज में बड़े पैमान पर एक धर्मांतरण समारोह आयोजित करने की घोषणा की थी जिसके बाद विवाद शुरू हो गया था। इसके बाद दो दिन पहले शहर में निषेधाज्ञा लगा दी गयी थी।

भाजपा के सांसद योगी आदित्यनाथ ने प्रस्तावित समारोह में शामिल होने की अपनी योजनाओं की घोषणा की थी और कहा था कि अगर लोग अपनी मर्जी से धर्मांतरण कर रहे हैं तो उनके दोबारा हिन्दू बनने में कुछ भी गलत नहीं है। वहीं भाजपा के जिलाध्यक्ष देवराज सिंह ने संवाददाताओं से कहा था कि हम समारोह का आयोजन नहीं कर रहे हैं लेकिन यदि बजरंग दल समेत दूसरे आयोजक इसे लेकर हमसे मदद मांगते हैं तो हम निश्चित रूप से उनकी हरसंभव रूप मदद करेंगे।

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सौ साल पुराने मंदिर को अब 50 हजार

2014-12-15 04:01:50 admin

मंडी। सौ साल से अधिक का पुराना इतिहास रखने वाले देवी-देवता के मंदिर का अब अच्छी तरह से मरम्मत कार्य होगा। मंदिर के मरम्मत कार्य के लिए मिलने वाली राशि अब ऊंट के मुंह में जीरे के समान नहीं होगी। भाषा एवं संस्कृति विभाग ने मरम्मत राशि को अब 25 हजार से बढ़ा कर पचास हजार कर दिया है।

हिमाचल प्रदेश में कोने-कोने में देवी-देवता वास करते हैं। हमारे प्राचीन ग्रंथों के साथ पौराणिक कथाओं में भी इसका उल्लेख मिलता है। हिमालय के आंचल में स्थित हिमाचल प्रदेश में आज भी सदियों पुराने मंदिर स्थित हैं जो शोधकर्ताओं के लिए शोध का अनूठा विषय भी बने हुए हैं। लेकिन वक्त के थपेड़ों के साथ सदियों पुराने मंदिर और देवालयों का वजूद भी मिटने के कगार पर है। जर्जर हो चुके मंदिर कभी भी गिर कर हादसे का सबब बन सकते हैं।

भाषा एवं संस्कृति विभाग पूर्व में इन मंदिरों की दशा सुधारने के लिए 25 हजार रुपये की राशि प्रदान करता था। जोकि ऊंट के मुंह में जीरे के समान रहती थी। देवसमाज से उठ रहे स्वरों को देखते हुए भाषा एवं संस्कृति विभाग ने अब इस सहायता राशि में इजाफा करते हुए इसे दोगुना यानी 50,000 रुपये कर दिया है।

सहायता राशि लेने वाले मंदिरों का भाषा एवं संस्कृति विभाग हर साल स्वयं चयन करता है। इसके लिए विभाग ने पैमाना निर्धारित किया हुआ है। विभाग उन्हीं मंदिर का चयन करता है जिसका इतिहास सौ साल से अधिक का है। इसके अलावा जिस स्थान पर देवता का मंदिर है वह जमीन भी देवता के अधीन होनी चाहिए। मंदिर की जमीन किसी अन्य व्यक्ति के नाम होगी तो उसका चयन नहीं होगा। इसके साथ साथ मंदिर की वर्तमान दशा भी चयन का आधार रहेगा। भाषा एवं संस्कृति विभाग हर साल प्रदेश में कुछ मंदिरों का चयन कर इनके मरम्मत कार्य के लिए सहायता जारी करती है।

इधर, जिला भाषा अधिकारी राजकुमार सकलानी ने सौ साल से अधिक का समृद्ध इतिहास रखने वाले ऐतिहासिक मंदिरों के मरम्मत कार्य की राशि को पचास हजार करने की पुष्टि की है।

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माघ मेला में रहेगा भरपूर गंगाजल

2014-12-15 03:58:41 admin

इलाहाबाद। माघ मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नरौरा बांध से प्रतिदिन 2500 क्यूसेक पानी छोड़ा जाएगा। 27 दिसंबर से शुरू होने वाला यह सिलसिला 17 फरवरी तक चलेगा।

सिंचाई विभाग द्वारा भेजे गए पत्र के परिप्रेक्ष्य में शासन ने यह निर्णय लिया है। माघ मेला शुरू होने के पहले हर साल शुद्ध गंगा जल के लिए साधु-संतों को विरोध प्रदर्शन करना पड़ता है। इस बार भी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी गई थी। इससे पहले ही सिंचाई विभाग के पत्र का संज्ञान लेते हुए शासन ने माघ मेले के दौरान श्रद्धालुओं को भरपूर पानी उपलब्ध कराने का बीड़ा उठाया है।

अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग (बाढ़ प्रखंड) आरपी यादव के मुताबिक नरौरा बांध से प्रतिदिन 2500 क्यूसेक पानी छोड़े जाने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए कुछ दिन पहले पत्र लिखकर शासन से अनुरोध किया गया था जिस पर शासन से मंजूरी मिल गई है। नरौरा से प्रयाग तक पानी पहुंचने में दस दिन लग जाते हैं। चूंकि माघ मेले का पहला स्नान पर्व पौष पूर्णिमा पांच जनवरी को होगा। ऐसे में मेले के लिए पानी छोडऩे की प्रक्रिया 27 दिसंबर से शुरू कर दी जाएगी।

सिंचाई विभाग का दावा- नरौरा से प्रतिदिन छोड़ा जाएगा 2500 क्यूसेक पानी

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व्रत-त्यौहार: 8 दिसंबर से 14 दिसंबर 2014

2014-12-08 09:35:30 admin

अंगारक गणेश संकष्ट चतुर्थी, 9 दिसंबर, मंगलवार

इस साल अंगारक संकष्ट चतुर्थी का व्रत तीन बार रखा जा रहा गया। पहला 18 फरवरी 2014 को, दूसरा 15 जुलाई 2014 और तीसरा आगामी 9 दिसंबर को आने वाला है। मंगलवार के दिन आने वाली चतुर्थी को अंगारक चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि जो लोग श्री गणेश अंगार की संकष्ट चतुर्थी के व्रत का पालन करते हैं उन्हें भगवान गणेश सभी कष्टों से मुक्ति दिला देते हैं। यह व्रत न केवल भगवान गणेश की कृपा प्रदान करता है अपितु मंगल देव की भी अपार कृपा का पात्र बनाता है 

इस व्रत के विषय में पुराणों में उल्लेख करते हुए कहा गया है कि मंगलवार का चतुर्थी के साथ संयोग भक्तों के लिए विशेष कृपा देने वाला होता है। पुराणों के अनुसार एक बार मंगल देव ने गणेशजी की कृपा पाने के लिए उनकी कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान गणेश ने उन्हें दर्शन दिए और कहा कि मृत्युलोक में जो भी तुम्हारा व्रत रखेगा उस पर मेरी और तुम्हारी विशेष कृपा होगी और वह सब प्रकार के कष्टों से मुक्त हो जाएगा। शास्त्रों में गणेश जी को सब देवताओं में प्रथम पूज्य माना गया है और उन्हें बुद्धि या विवेक का देवता वर्णित किया गया है।



इस दिन गणेशजी का व्रत रखने वाले उपासक को सुबह उठकर स्नान के बाद भगवान का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए। संकल्प लेते समय "अहं सर्वकर्मसिद्धये सिद्धिविनायकपूजनं करिष्यामि" मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। व्रतधारी को एक कलश में पानी भरकर उसके मुंह पर कोरा कपड़ा बांधकर उसके ऊपर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए। व्रतधारी को पूरा दिन निराहार रहना चाहिए और शाम को सूर्यास्त के बाद पूरे विधि विधान के साथ भगवान गणेश की पूजा और आरती करनी चाहिए। रात्रि में चंद्रमा के उदय होने के बाद अर्घ्य देना चाहिए। जहां तक संभव हो पूरा दिन ' ओम् गं गौं गणपतये नम:' का जाप करते रहना चाहिए।

कालाष्टमी, 14 दिसंबर, रविवार

कालाष्टमी को काला अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। प्रत्येक मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन इसे मनाया जाता है। कालभैरव के भक्त हर कालाष्टमी के दिन उनकी पूजा और व्रत करते हैं। ऐसा विश्वास है कि काल भैरव का व्रत रखने वाले भक्तों के सभी कष्ट इस व्रत को रखने से समाप्त हो जाते हैं। सबसे मुख्य कालाष्टमी को कालभैरव जयंती के नाम से जाना जाता है।

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साध्वी के बयान का बवाल थमा, राज्यसभा में कामकाज शुरू

2014-12-08 09:29:30 admin

नई दिल्ली 



साध्वी निरंजन ज्योति की विवादास्पद टिप्पणी के मुद्दे पर राज्यसभा में पिछले एक सप्ताह से चला आ रहा गतिरोध सोमवार को सभापति के एक प्रस्ताव पढ़ने के बाद समाप्त हो गया। प्रस्ताव में संसद के सभी सदस्यों, मंत्रियों और सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से सार्वजनिक बयानों में हर कीमत पर शिष्टता बरतने की बात कही गई है। इस तरह के बयान को लेकर विपक्ष की मांग पर आज आखिरकार सहमति बन गई और उच्च सदन में तीन बार के स्थगन के बाद प्रश्नकाल के दौरान सभापति के यह बयान पढ़े जाने के बाद सदन में सामान्य ढंग से कामकाज चलने लगा। 



सभापति हामिद अंसारी ने प्रस्ताव में कहा,'सदन इस सभा में 4 दिसंबर को प्रधानमंत्री के दिए गए बयान पर सहमति जताते हुए संसद के सभी सदस्यों, मंत्रियों और सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से अपील करता है कि संसदीय लोकतंत्र को सफलतापूर्वक चलाने की खातिर और संवैधानिक मूल्यों के लिए हमारी प्रतिबद्धता को बरकरार रखने के मकसद से सार्वजनिक बयानों में हर कीमत पर शिष्टता कायम रखी जाए।' 

 

 

इससे पहले सोमवार को सदन की बैठक शुरू होने पर विपक्ष ने इस तरह का निंदा प्रस्ताव लाने की अपनी मांग को फिर दोहराया। कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने दो पंक्ति का निंदा प्रस्ताव पारित करने की पेशकश की। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव पर सदन में मतदान कराया जाना चाहिए। संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद और ससंदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने उनकी इस पेशकश का कड़ा विरोध किया। 



उपसभापति पी जे कुरियन ने भी इसे नामंजूर करते हुए कहा कि यह प्रस्ताव उनकी मंजूरी से नहीं लाया गया है। उपसभापति द्वारा प्रस्ताव को पेश करने की मंजूरी नहीं दिए जाने के विरोध में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और तृणमूल के कई सदस्य नारेबाजी करते हुए आसन के पास आ गए। इसी बीच सत्ता पक्ष के कई सदस्यों ने सदन की कार्यवाही चलने देने की मांग शुरू कर दी। सदन में हो रहे हंगामे के कारण उप सभापति ने दोपहर करीब सवा ग्यारह बजे बैठक को 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। बाद में कारण बताए बिना बैठक को 15 मिनट और 10 मिनट के लिए फिर स्थगित किया गया। 



राज्यसभा सूत्रों के अनुसार, इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच यह सहमति बनी कि प्रधानमंत्री के सदन में दिए गए बयान के आधार पर सभापति एक प्रस्ताव पढ़ेंगे, जिसमें सार्वजनिक बयानों में शिष्टता बरतने की बात होगी। इसी सहमति के आधार पर बाद में सभापति ने सदन में प्रस्ताव पढ़ा और गतिरोध समाप्त हो गया। 



गौरतलब है कि पिछले सप्ताह मंगलवार से ही साध्वी निरंजन ज्योति की विवादस्पद टिप्पणियों को लेकर सदन में गतिरोध बना हुआ था। साध्वी निरंजन ज्योति ने मंगलवार को दोनों सदनों में दिए गए बयान में अपने शब्दों पर खेद व्यक्त किया था। उन्होंने राज्यसभा में यह भी कहा था कि अगर सदन को लगता है तो वह अपनी टिप्पणियों पर माफी मांगने के लिए भी तैयार हैं। 



बाद में विपक्ष की मांग पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दोनों सदनों में दिए गए बयान में मंत्री के एक सार्वजनिक सभा में दिए गए विवादास्पद बयान को पूरी तरह से नामंजूर कर दिया था। लेकिन विपक्ष प्रधानमंत्री की मांग से संतुष्ट नहीं हुआ और उसने पहले मंत्री को बर्खास्त करने और बाद में अपने रुख को नरम करते हुए निंदा प्रस्ताव पारित किए जाने की मांग की थी। सरकार पिछले हफ्ते निंदा प्रस्ताव की विपक्ष की मांग पर यह कह कर सहमत नहीं हुई थी कि प्रधानमंत्री के बयान के बाद यह मामला समाप्त हो जाना चाहिए।

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मंगल कभी नही करता अमंगल

2014-11-25 04:31:53 admin

मंगल भूमिपुत्र है, मंगल कभी अमंगल नही करता। अमूमन जन्म कुंडलियों में ग्रहों की सही विवेचना नहीं होने के कारण मंगल दोष की स्थिति बन जाती है। इस वजह से अच्छे रिश्ते नहीं हो पाते हैं। प्रायः कम्प्यूटर से कुंडली मिलाने पर 90 प्रतिशत कुंडलियों में मांगलिक दोष बताया जाता है।

लेकिन कुंडली का गहराई से अध्ययन करने पर पता चलता है कि उसमे मंगल का दोष है ही नहीं। इसीलिए मंगल उनके जीवन को मंगलकारी बनाएगा ।मंगल की भ्रान्तियों को स्वयं दूर कर सही वर-कन्या का चयन करना चाहिए।

ऐसे होता है मंगल दोष का समाधान

विवाह के संदर्भ में वर एवं कन्या के माता-पिता मंगल दोष के भय से हमेशा घबराए हुए रहते हैं। जनमानस में मंगल दोष का भय इतना अधिक व्याप्त है, कि वर-कन्या के माता-पिता मांगलिक वर-कन्या खोजते रहते हैं, इस कारण वर-कन्या के विवाह में विलम्ब होता है।

क्योंकि मंगल दोष के कुप्रभाव को मनीषियों व ज्योतिर्विदों ने इतना महिमा मंडित किया है कि इस दोष के कारण कभी-कभी वर-कन्याओं को आजन्म कुंवारा/ कुंवारी ही रहना पड़ता है। जनमानस नहीं जानता कि मंगल दोष का परिहार जन्मकुंडली में स्वयंमेव हो जाता है।

अमूमन जन्म कुंडली में मंगल के 1,4,7,8,12 होने पर मंगल दोष होता है। जन्म पत्रिका में जिन पांच स्थानों से मंगल दोष बनता है। यदि वहां मंगल के साथ चन्द्रमा, गुरु, शनि हो तो मांगलिक दोष स्वयमेव समाप्त हो जाता है, साथ ही मंगल को शनि 3,7,10 वीं पूर्ण दृष्टि से देखता है तो मंगल दोष नहीं रहता है।

जन्म कुंडली के केन्द्र स्थान 1,4,7,10 या 9,5 में चन्द्रमा अथवा गुरु हो तो बिल्कुल भी मंगल दोष नहीं रहता है। साथ ही जन्म पत्रिका के छठे या ग्यारहवें स्थान पर राहु होते मांगलिक दोष स्वयमेव समाप्त हो जाता है।

लग्न अनुसार मंगली दोष

मेष लग्न को मंगल दोष नहीं रहता है, वृषभ लग्न को 1, मिथुन लग्न को 7, कर्क लग्न को 8, सिंह लग्न को मंगल दोष नहीं रहता है, कन्या लग्न को 1,4,7 तुला लग्न को 1,12 वृष्चिक लग्न को 8, धनु लग्न को 1,4, मकर लग्न को 12, कुम्भ लग्न को 1 , मीन लग्न को 1,4,7,12 में मंगल दोष नहीं रहता है।

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सतलोक में सैकड़ों लाठियां और हेल्मेट मिले

2014-11-24 05:28:50 admin

सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल को पुलिस रविवार को पुलिस रिमांड के दौरान निशानदेही और पूछताछ के लिए सतलोक आश्रम लेकर पहुंची। खास बात यह थी कि पुलिस को खास कोड से खुलने वाले लॉकर खुलवाने के लिए रामपाल को यहां लाना जरूरी था। खबर है कि पुलिस ने लॉकर खुलवा भी लिए लेकिन उससे क्या बरामद हुआ इसकी जानकारी अभी नहीं दी गई है। इसके अलावा आश्रम के मेन गेट के साथ बने दो कमरों से सैकड़ों लाठियां बरामद की गईं। यहां से बड़ी संख्या में हेल्मेट भी बरामद हुए।

स्पेशल इन्वेटिगेशन टीम ने आश्रम में सर्च अभियान लगातार तीसरे दिन भी जारी रखा। इन लाठियों और हेल्मेट को पुलिस को दो ट्रैक्टर-ट्रालियों में भरकर ले जाना पड़ा। सर्च अभियान के दौरान कुछ और गन भी बरामद हुईं। रामपाल इस समय पुलिस रिमांड पर हैं और पुलिस उनसे आश्रम में होने वाली गतिविधियों और आश्रम की सम्पत्ति और अन्य प्रकार के ब्यौरों की जानकारी हासिल करने का प्रयास कर रही है। सर्च ऑपरेशन के दौरान लॉकर खुलवाने के लिए पुलिस रामपाल को आश्रम में लाए जाने के दौरान सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त रहे। जब पुलिस रामपाल को लेकर आश्रम के अंदर गई तो मीडिया को भी अंदर नहीं जाने दिया गया। रामपाल ने आश्रम में पूछताछ के दौरान ही तबीयत खराब होने की शिकायत की, जिस पर उसे पुलिस हिसार के सिविल हॉस्पिटल ले गई और मेडिकल जांच करवाई।

रामपाल को 25 नवम्बर को हिसार की कोर्ट में पेश किया जाना है। सतलोक आश्रम बरवाला सीआरपीएफ के पहरे में हैं। यहां आने-जाने वाले पुलिसकर्मियों की भी सीआरपीएफ के जवानों द्वारा तलाशी ली जा रही है। आश्रम से बरामद होने वाले सारे सामान पूरी लिस्ट बनाकर और बरामदगी के कागजात तैयार करके ही पुलिस को ले जाने दिया जा रहा है। पूरे आश्रम का सर्च अभियान पूरा होने में अब भी एक हफ्ते से ज्यादा का वक्त लगने का अनुमान है। अब तक यहां से 125 से ज्यादा वाहन जब्त हो चुके हैं। इनमें एक लग्जरी बस, कई कारें और बाइक शामिल हैं। रामपाल की एक बुलेटप्रूफ सफारी गाड़ी भी इस सर्च अभियान के दौरान आश्रम से मिली। गौरतलब है कि रामपाल समर्थकों की झड़प के दौरान 5 महिलाओं और 1 नवजात की मृत्यु हो गई थी, यह उस वक्त हुआ जब पुलिस आश्रम में घुसने की कोशिश कर रही था। मंगलवार को हुई झडपों में 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।

1 करोड़ का लेनदेन

यह भी जानकारी मिली है कि जब बरवाला में बवाल चल रहा था और सतलोक आश्रम पुलिस से घिरा हुआ था तो पुलिस के गेट तक पहुंचने पर आश्रम के ट्रस्ट के बैंक खाते से एक करोड़ रुपये से ज्यादा का लेन देन हुआ था। पंजाब नैशनल बैंक की बरवाला शाखा से इस रकम का स्थानांतरण हुआ है।

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भोजेश्वर मंदिर: यहां है एक ही पत्थर से निर्मित विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग

2014-11-23 14:46:12 admin

भोजपुर। मध्य प्रदेश कि राजधानी भोपाल से 32 किलो मीटर दूर स्थित है। भोजपुर से लगती हुई पहाड़ी पर एक विशाल, अधूरा शिव मंदिर हैं। यह भोजपुर शिव मंदिर या भोजेश्वर मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हैं। भोजपुर तथा इस शिव मंदिर का निर्माण परमार वंश के प्रसिद्ध राजा भोज (1010 ई – 1055 ई ) द्वारा किया गया था। इस मंदिर कि अपनी कई विशेषताएं हैं।

इस मंदिर कि पहली विशेषता इसका विशाल शिवलिंग हैं जो कि विश्व का एक ही पत्थर से निर्मित सबसे बड़ा शिवलिंग हैं। सम्पूर्ण शिवलिंग कि लम्बाई 5.5 मीटर (18 फीट ), व्यास 2.3 मीटर (7.5 फीट ), तथा केवल शिवलिंग कि लम्बाई 3.85 मीटर (12 फीट ) है।

दूसरी विशेषता- भोजेश्वर मंदिर के पीछे के भाग में बना ढलान है, जिसका उपयोग निर्माणाधीन मंदिर के समय विशाल पत्थरों को ढोने के लिए किया गया था। पूरे विश्व में कहीं भी अवयवों को संरचना के ऊपर तक पहुंचाने के लिए ऐसी प्राचीन भव्य निर्माण तकनीक उपलब्ध नहीं है। ये एक प्रमाण के तौर पर है, जिससे ये रहस्य खुल गया कि आखिर कैसे 70 टन भार वाले विशाल पत्थरों का मंदिर शीर्ष तक पहुचाया गया।

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कामेश्वर धाम: यहां भगवान शिव ने कामदेव को किया था भस्म

2014-11-23 14:39:27 admin

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में है कामेश्वर धाम। इस धाम के बारे में मान्यता है कि यह, शिव पुराण मे वर्णित वही जगह है जहा भगवान शिव ने देवताओं के सेनापति कामदेव को जला कर भस्म कर दिया था। यहां पर आज भी वह आधा जला हुआ, हरा भरा आम का वृक्ष (पेड़) है जिसके पीछे छिपकर कामदेव ने समाधी मे लीन भोले नाथ को समाधि से जगाने के लिए पुष्प बाण चलाया था।

आखिर क्यों महादेव शिव ने कामदेव को भस्म किया ?

भगवान शिव द्वारा कामदेव को भस्म करने कि कथा (कहानी) शिव पुराण मे इस प्रकार है। भगवान शिव कि पत्नी सती अपने पिता द्वारा आयोजित यज्ञ मे अपने पति भोलेनाथ का अपमान सहन नही कर पाती है और यज्ञ वेदी मे कूदकर आत्मदाह कर लेती है। जब यह बात शिवजी को पता चलती है तो वो अपने तांडव से पूरी सृष्टि मे हाहाकार मचा देते है। इससे व्याकुल सारे देवता भगवान शंकर को समझाने पहुंचते है। महादेव उनके समझाने से शान्त होकर, परम शान्ति के लिए, गंगा तमसा के इस पवित्र संगम पर आकर समाधि मे लिन हो जाते है।

इसी बीच महाबली राक्षस तारकासुर अपने तप से ब्रह्मा जी को प्रसन्न करके ऐसा वरदान प्राप्त कर लेता है जिससे की उसकी मृत्यु केवल शिव पुत्र द्वारा ही हो सकती थी। यह एक तरह से अमरता का वरदान था क्योकि सती के आत्मदाह के बाद भगवान शिव समाधि मे लीन हो चुके थे।

इसी कारण तारकासुर का उत्पात दिनो दिन बढ़ता जाता है और वो स्वर्ग पर अधिकार करने कि चेष्टा करने लगता है। यह बात जब देवताओं को पता चलती है तो वो सब चिंतित हो जाते है और भगवान शिव को समाधि से जगाने का निश्चय करते है। इसके लिए वो कामदेव को सेनापति बनाकर यह काम कामदेव को सोपते है। कामदेव, महादेव के समाधि स्थल पहुंचकर अनेकों प्रयत्नो के द्वारा महादेव को जगाने का प्रयास करते है, जिसमे अप्सराओ के नृत्य इत्यादि शामिल होते है, पर सब प्रयास बेकार जाते है।

अंत में कामदेव स्वयं भोले नाथ को जगाने लिए खुद को आम के पेड़ के पत्तो के पीछे छुपाकर शिवजी पर पुष्प बाण चलाते है। पुष्प बाण सीधे भगवान शिव के हृदय मे लगता है, और उनकी समाधि टूट जाति है। अपनी समाधि टूट जाने से भगवान शिव बहुत क्रोधित होते है और आम के पेड़ के पत्तो के पिछे खडे कामदेव को अपने त्रिनेत्र से जला कर भस्म कर देते है।

कई संतो कि तपोभूमि रहा है कामेश्वर धाम-

त्रेतायुग में इस स्थान पर महर्षि विश्वामित्र के साथ भगवान श्रीराम लक्ष्मण आये थे जिसका उल्लेख बाल्मीकीय रामायण में भी है। अघोर पंथ के प्रतिष्ठापक श्री कीनाराम बाबा की प्रथम दीक्षा यहीं पर हुई थी। यहां पर दुर्वासा ऋषि ने भी तप किया था।

बताते हैं कि इस स्थान का नाम पूर्व में कामकारू कामशिला था। यही कामकारू पहले अपभ्रंश में काम शब्द खोकर कारूं फिर कारून और अब कारों के नाम से जाना जाता है।

कामेश्वर धाम कारो मे तीन प्राचीन शिवलिंग व शिवालय स्थापीत है।

श्री कामेश्वर नाथ शिवालय-

यह शिवालय रानी पोखरा के पूर्व तट पर विशाल आम के वृक्ष (पेड़) के नीचे स्थित है। इसमें स्थापित शिवलिंग खुदाई में मिला था जो कि ऊपर से थोड़ा सा खंडित है।

श्री कवलेश्वर नाथ शिवालय-

इस शिवालय कि स्थापना अयोध्या के राजा कमलेश्वर ने कि थी। कहते है की यहां आकर उनका कुष्ट का रोग सही हो गया था इस शिवालय के पास मे हि उन्होने विशाल तालाब बनवाया जिसे रानी पोखरा कहते है।

श्री बालेश्वर नाथ शिवालय-

बालेश्वर नाथ शिवलिंग के बारे मे कहा जाता है कि यह एक चमत्कारिक शिवलिंग है। किवदंती है की जब 1728 में अवध के नवाब मुहम्मद शाह ने कामेश्वर धाम पर हमला किया था तब बालेश्वर नाथ शिवलिंग से निकले काले भौरो ने जवाबी हमला कर उन्हे भागने पर मजबूर कर दिया था।

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दुनिया रंगीन क्यों दिखती है?

2014-11-10 05:47:55 admin

आंखों को ईश्वर की अनमोल भेंट कहा जाता है। इनके द्वारा हम इस रंग-बिरंगी दुनिया को देख सकते है। आंखों की कीमत वह व्यक्ति भली- भांति जानता है, जिसकी आंखों की रोशनी किसी वजह से चली जाती है। आखिर हमारी आंखों मे ऐसी क्या विशेषता है, जो वे हर चीज को उसके वास्तविक रगं रूप में देख लेती है।

 

हमारी आंखों की रेटीना पर छोटी-छोटी कोशिकाओें की एक परत होती है। इन कोशिकाओं को रॉड्स और कोन्स कहा जाता है। इन कोशिकाओं में ऐसा प्रकाश संवेदी पदार्थ होता है, जो अलग-अलग रंगों का प्रकाश पड़ने पर प्रतिक्रिया दिखाता है। रॉड्स नामक कोशिकाएं सिर्फ ब्लैक एंड व्हाइट प्रकाश के प्रति प्रतिक्रिया दिखाती है, जबकि कोन्स नामक कोशिकाएं विभिन्न रंगों के  प्रकाश के प्रति प्रतिक्रिया दिखाती हैं। जब भी कोन्स कोशिकाओं पर अलग-अलग रंग का प्रकाश पड़ता है, तो उस रंग से सम्बन्धित सूचना मस्तिष्क को भेजती है। इसी के फलस्वरूप हम किसी भी वस्तु की रंगीन छवि देख पाते हैं, लेकिन इन कोशिकाओं की एक विशेषता यह है कि ये सिर्फ चमकीले प्रकाश में ही काम करती है। यही वजह है कि जब प्रकाश कम हो, तब हम कई चीजों को उनसे वास्तविक रंग में नहीं देख पाते।

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पाकिस्तान में भी है शक्ति पीठ

2014-09-30 19:16:51 admin
कहते हैं हिंदू गंगाजल में स्नान करें या मद्रास के मंदिरों में जप करें, वह अयोध्या जाए या उत्तरी भारत के मंदिरों में जाकर पूजा-आर्चना करें। यदि उसने हिंगलाज की यात्रा नहीं की तो उनकी तीर्थों की यात्रा अधूरी है। हिंगलाज में हर साल मार्च में हजारों हिंदू पहुंचते हैं और तीन दिनों तक जप करते हैं। माता का एक शक्तिपीठ जिसकी पूजा मुसलमान भी करते हैं यह शक्तिपीठ पाकिस्तान के बलूचिस्तान राज्य में स्थित है। 


मुसलमान देवी हिंगलाज को नानी का मंदिर और नानी का हज भी कहते हैं। इस स्थान पर आकर हिंदू और मुसलमान का भेद भाव मिट जाता है। दोनों ही भक्ति पूर्वक माता की पूजा करते हैं। यहां पास में ही हिंगला नदी प्रवाहित होती है। माता का यह मंदिर हिंगलाज देवी शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है। पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु के चक्र से कटकर यहां पर देवी सती का सिर गिरा था। इसलिए यह स्थान चमत्कारी और दिव्य माना जाता है। 
 
ज्योति के दर्शन

इस शक्तिपीठ में ज्योति के दर्शन होते हैं। गुफा में हाथ व पैरों के बल जाना होता है। 
 
मंदिर से जुड़ी मान्यताएं- हिंगलाज देवी शक्तिपीठ के विषय में ब्रह्मवैवर्त पुराण में कहा गया है कि जो एक बार माता हिंगलाज के दर्शन कर लेता है। उसे पूर्वजन्म के कर्मों का दंड नहीं भुगतना पड़ता है। मान्यता है कि परशुराम जी द्वारा 21 बार क्षत्रियों का अंत किए जाने पर बचे हुए क्षत्रियों ने माता हिंगलाज से प्राण रक्षा की प्रार्थना की। माता ने क्षत्रियों को ब्रह्मक्षत्रिय बना दिया। इससे परशुराम से उन्हें अभय दान मिल गया।


एक मान्यता यह भी है कि रावण के वध के बाद भगवान राम को ब्रह्म हत्या का पाप लगा। इस पाप से मुक्ति पाने के लिए भगवान राम ने भी हिंगलाज देवी की यात्रा की थी। राम ने यहां पर एक यज्ञ भी किया था। माता हिंगलाज माता वैष्णों की तरह एक गुफा में विराजमान हैं। 
 
कैसी है यात्रा
हिंगलाज माता मंदिर जाने के लिए पासपोर्ट और वीजा जरूरी है। हिंगलाज की यात्रा कराची से प्रारंभ होती है। कराची से लगभग 10 किलोमीटर दूर हॉव नदी है। मुख्य यात्रा वहीं से शुरू होती है। हिंगलाज जाने के पहले लासबेला में माता की मूर्ति का दर्शन करने होते हैं। यह दर्शन छड़ी वाले पुरोहित कराते हैं। वहां से शिवकुण्ड (चंद्रकूप) जाते हैं, जहां अपने पाप की घोषणा कर नारियल चढ़ाते हैं। जिनकी पाप मुक्ति हो गई और दरबार की आज्ञा मिल गई। उनका नारियल और भेंट स्वीकार हो जाती है।
 
चंद्रकूप- हिंगुलाज को आग्नेय शक्तिपीठ तीर्थ भी कहते हैं, क्योंकि वहां जाने से पहले अग्नि उगलते चंद्रकूप पर यात्री को जोर-जोर से अपने गुप्त पापों का विवरण देना पड़ता है। साथ ही, भविष्य में उन पापों को न दोहराने का वचन भी देना पड़ता है। जो अपने पाप छिपाते हैं, उन्हें आज्ञा नहीं मिलती और उन्हें वहीं छोड़कर अन्य यात्री आगे बढ़ जाते हैं। इसके बाद चंद्रकूप दरबार की आज्ञा मिलती है। चंद्रकूप तीर्थ पहाडिय़ों के बीच में धूम्र उगलता एक ऊंचा पहाड़ है। वहां विशाल बुलबुले उठते रहते हैं। आग तो नहीं दिखती, लेेकिन अंदर से यह खौलता, भाप उगलता ज्वालामुखी है।

 

अंतिम पड़ाव-मां की गुफा के अंतिम पड़ाव पर पहुंच कर यात्री विश्राम करते हैं। अगले दिन सूर्योदय से पूर्व अघोर नदी में स्नान करके पूजन सामग्री लेकर दर्शन हेतु जाते हैं। नदी के पार पहाड़ी पर मां की गुफा है। गुफा के पास ही अतिमानवीय शिल्प-कौशल का नमूना माता हिंगलाज का महल है, जो यज्ञों द्वारा निर्मित माना जाता है। एक नितांत रहस्यमय नगर जो प्रतीत होता है, मानों पहाड़ को पिघलाकर बनाया गया हो।



हवा नहीं, प्रकाश नही, लेकिन रंगीन पत्थर लटकते हैं। वहां के फर्श भी रंग-बिरंगे हैं। दो पहाडिय़ों के बीच रेतीली पगडंडी। कहीं खजूर के वृक्ष, तो कही झाड़ियों के बीच पानी का सोता। उसके पार ही है मां की गुफा। कुछ सीढ़ियां चढ़कर, गुफा का द्वार आता है। इस विशालकाय गुफा के अंतिम छोर पर वेदी पर दिया जलता रहता है। यहां कोई मूर्ति नहीं है हां पिण्डी जरूर हैं। मां की गुफा के बाहर विशाल शिलाखण्ड पर, सूर्य-चन्द्रमा की आकृतियां अंकित हैं। कहते हैं कि इन आकृतियों को राम ने यहां यज्ञ के बाद खुद अंकित किया था।

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गया में शुरु हुआ पितृपक्ष मेला

2014-09-08 11:22:40 admin

मेले में दस लाख लोगों की पहुंचने की संभावना

पटना । पितृपक्ष की शुरुआत के साथ सोमवार को गयाजी में पितृपक्ष का मेला शुरु हो गया। यहां देशभर से

ंिपडदानियों का गया आना शुरू हो गया है। यहां इस साल करीब १० लाख लोगों के पहुंचने की संभावना है।

मेले को लेकर सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। फल्गु नदी और विष्णुपद सहित ५४ ंिपडवेदियों पर आज से तर्पण और ंिपडदान का कर्मकांड प्रारंभ हो जाएगा। जिला प्रशासन ने तीर्थ यात्रियों के सुविधा के लिए गयाजी में आवास, ंिरग बस सेवा और स्वास्थ्य सेवा के बेहतर इंतजाम किए हैं। सारे अस्पतालों में उनके लिए अलग से व्यवस्था की गई है। पूरे मेला क्षेत्र में लगभग दो दर्जन स्थानों पर पुलिस शिविर लगाए गए हैं। इस मेले को राजकीय मेले का दर्जा मिला हुआ है। हालांकि गया में आने वाले ंिपडदानियों ने सफाई को लेकर थोड़ा असंतोष जताया है। विष्णुपद मंदिर के प्रबंध कार्यकारिणी के सदस्य भी मंदिर परिसर के बाहर और शहर की सफाई की मांग जिला प्रशासन से की है। विष्णुपद परिसर में प्रतिदिन संध्याकाल में प्रवचन और फल्गु आरती का आयोजन किया जाएगा। प्रवचन देने देश के कोने-कोने से संत गया आ चुके हैं।

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भीम ने यहाँ लिया था द्रौपदी के अपमान का प्रतिशोध|

2014-08-13 05:11:17 admin
अमरावती. महाराष्ट्र के विदर्भ में बसा चिखलदरा हिल स्टेशन। महाभारत के समय पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान यहां कुछ बिताया था। अज्ञातवास के दौरान महाभारत के कीचक नाम के पात्र ने द्रौपदी से अनैतिक व्हवहार की कोशिश की थी। इस पर गुस्साए भीम ने उसे मारकर इसी खाई में फेंक दिया था। आज भी ये खाई महाभारत काल में हुए उस घटना की गवाह है। यहां आने वाले पयर्टकों को महाभारत से जुड़ी रोचक जानकारियां भी यहां मिलती हैं।
 
चिखलदरा हिल स्टेशन नैसर्गिक सौन्दर्यता के अलावा पौराणिक स्थलों के लिए मशहूर है। उल्लेखनीय है कि चिखलधरा को पौराणिक काल में विराट नगर भी कहा जाता था। अज्ञातवास के दौरान यहां के राजा विराट की रानी सुदेष्णा ने द्रौपदी और पांडवों को काम पर रखा था। कीचक ही रानी सुदेष्णा का भाई था, जिसने द्रौपदी के साथ अनैतिक व्यवहार किया था। कीचक के वध के बाद से ही इस स्थान का नाम चिखलधरा पड़ा।  
 
चिखलदरा महाराष्ट्र में मेलघाट टाइगर रिजर्व के पास है और वृहद सतपुड़ा पर्वत श्रेणी का ही एक हिस्सा है। चिखलदरा प्राकृतिक मनोरम दृश्यों के साथ ही सुंदर झीलों, प्राचीन दुर्गों और वन्यजीवन के लिए मशहूर है। बारिश के मौसम में आप यहां गहरी और खड़ी घाटी में कई जल प्रपातों को आकार लेते देख सकते हैं। इस सीजन में चिखलदरा प्रकृतिप्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं होता। 
 
रॉबिंसन ने खोजा था इसे
 
यह हिल स्टेशन हैदराबाद रेजीमेंट के कप्तान रॉबिन्सन द्वारा वर्ष 1823 में खोजा गया था। अंग्रेजों ने इस स्थान को कॉफी प्लांटेशन और स्वास्थ्य लाभ लेने के लिए विकसित किया था। चिखलदरा अपने मनोरम दृश्यों, वन्य जीव अभयारण्य और ऐतिहासिक दुर्गों की वजह से प्रसिद्ध है। 
 
भीमकुंड 
 
भीमकुंड लगभग 3500 फीट गहरा है। यहां आप एक भव्य जलप्रपात देख सकते हैं। एक पौराणिक कथा के अनुसार कीचक का वध करने के बाद भीम ने इसी जलप्रपात में स्नान किया था। बारिश के मौसम में यह स्थान कई जलप्रपातों और जलधाराओं से मनोहारी दृश्य प्रस्तुत करता है।

देखने लायक स्थान
 
पंचबोल पॉइंट
पंचबोल पॉइंट की सुंदरता अद्भुत है। यहां कॉफी के बागान हैं। साथ ही गहरी घाटी से लगी पांच पहािड़यों की शृंखला और उनसे गिरते कई झरने भी नजर आते हैं। 
 
देवी पॉइंट 
यहां भी बारिश के मौसम में कई जल प्रपात और अन्य सुंदर जलधाराएं नजर आती हैं। इसके पास ही स्थानीय देवी माता का मंदिर है। इस मंदिर में एक जलधारा सालभर बहती रहती है।
 
गविलगढ़ दुर्ग 
अमरावती जिले में स्थित इस दुर्ग को 300 साल पहले गवली के राजा ने बनवाया था। पर्यटक यहां की गई नक्काशी और लोहे, कांसे व तांबे से निर्मित तोपों को देख सकते हैं। 
 
कहां ठहरें?
यहां महाराष्ट्र पर्यटन विभाग द्वारा संचालित एक होटल है। इसके अलावा कई निजी होटल भी उचित किराए पर उपलब्ध हैं। 
कैसे पहुंचें?
निकटतम हवाई अड्‌डा 240 किलोमीटर दूर नागपुर है। निकटतम रेलवे स्टेशन 100 किलोमीटर दूर अमरावती है। 
क्या खाएं?
यहां आप विशिष्ट महाराष्ट्रियन व्यंजनों का लुत्फ ले सकते हैं। यद्यपि अन्य प्रकार के व्यंजन भी यहां की होटलों में उपलब्ध हैं। 
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