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शादी से पहले जरूर करें ये सात संवाद

2014-11-25 04:52:58 admin

शादी से पहले के सावाल

शादी दरअसल दो लोगों के बीच विश्वास और परस्पर तालमेल का रिश्ता होता है। इसलिए यह बहुत जरूरी होता है कि शादी से पहले कुछ महत्‍वपूर्ण बतों को लेकर एक सफल संवाद कर लिया जाए। तो यदि आपकी शादी होने वाली है या आप अपने लिए बेस्ट पार्टनर की तलाश कर रहे/रही हैं, तो कुछ ये बातें पहले ही उनके साथ कर लें।

शादी का महत्व

आजकल शादी से पहले लड़कों और लड़कियों को एक-दूसरे से बात करने का मौका मिलता है, जो पहले लोगों को नहीं मिला करता था। इसलिए खुल कर कुछ बातें कर लेनी चाहिए।  सवालों के जवाब इससे आपकी शादी की बुनियाद मजबूत हो जाती है। आप साथी से जाने की कोशिश करें कि वह शादी क्‍यों करना चाहता/चाहती है और उसके जीवन में शादी का क्‍या महत्‍व है?

जीवन की प्राथमिकताएं

आप उनसे पूछ लें कि शादी के बाद उन्हें सिंगल फैमिली में रहना पसंद है या फिर परिवार के साथ। और यदि जॉब ट्रांसफर होता है तो उस स्थिति में किस प्रकार से फैसला लेना चाहिए आदि।

निवेश और आर्थिक स्थिति के बारे में

दोनों को एक-दूसरे के निवेश के बारे में जरूर बात कर लेनी चहिए। कि किसकी कितनी सेविंग है और भविष्य में जिम्मेजारियों को पूरा करने के लिए किस प्रकार से निवेष किया जाएगा।

फैमली प्लानिंग पर बात

अपने होने वाले पार्टनर से परिवार की शुरुआत करने से पहले ही इस बात पर चर्चा कर लें कि वह कब और कितने बच्चे चाहते/चाहती हैं? और बच्चों को लेकर उनके बारे में क्या विचार हैं।

जीवन के लक्ष्य

शादी से पहले एक-दूसरे के लक्ष्य के बारे में बातचीत करना बेहद जरूरी होता है। इस पर बात कर लेनी चाहिए की परिवार और करियर को किस प्रकार से मेनेज किया जाएगा और फिर दोनों को एक-दूसरे के लक्ष्य का सम्मान भी करना चाहिए।

धर्म और वैल्यू

शादी के पहले धर्म, नैतिकता, ईमानदारी और निजी विचारधारा पर भी खुलकर बात होनी चाहिए। इन सारी बातों का असर बच्चों पर और भिविष्य के जीवन पर बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ता है। अगर इन विषयों पर बहुत ज्यादा मतभेद हों तो समस्याएं हो सकती हैं।

हैल्थ चैक-अप

मद्रास हाईकोर्ट ने भी कहा था कि नपुंसकता के आधार पर तलाक के बढ़ते जा रहें हैं, और इन पर रोक लगाने के लिए जरूरी है कि शादी से पहले वर वधू की मेडिकल जांच को अनिवार्य किया जाए। किसी प्रकार की बीमारी से बचने के लिए भी यह बेहद जरूरी होता है।

 

दूरी बढ़ाने लगें

उनके प्यार में आने लगेगी कमी। अगर आपके साथी का मन बदल चुका है, तो उसके प्यार में बदलाव नजर आने लगेगा। वह शार‍ीरिक और भावनात्मक दोनों रूप से आपसे खिंचा-खिंचा सा रहने लगेगा।

उपस्थिति में अचानक से बदलाव

आजकल वह अपने आप पर कुछ ज्यादा ही ध्यान देने लगे हैं। बालों के स्टाइल से लेकर, चेहरे की रूप रंगत तक हर चीज में परफेक्शन का जुनून उन पर सवार है, तो ये संकेत काफी कुछ कहते हैं। लगातार नयी खरीददारी की जा रही है, आपसे जरा कटा-कटा सा रहा जा रहा है, तो यह आपके रिश्ते में आ रही दूरियों के संकेत हैं।

व्यवहार में परिवर्तन

यदि आपको अपने पार्टनर के व्यवहार में अचानक परिवर्तन दिखाई दे रहा है। परिवर्तन ऐसा कि वह हर बात को सही ठहराने में लगा हुआ है और उसके विचार रुढ़िवादी विचार से खुले विचार में परिवर्तन हो रहे हैं।

ऑफिस में ज्यादा समय बिताना

आपका पार्टनर आजकल कुछ ज्यादा ही व्यस्त रहने लगा है। लेकिन जब इस ओवरटाइम के पैसों की बात जाए तो ना-नुकर करने लगता है। साथ ही वह पहले की तुलना में घर से दूर, अपने सप्ताहांत या शाम गुजारने लगा है।

गहराती दोस्ती

आजकल अपने दोस्तों और सहकर्मियों के संग कुछ ज्यादा ही बाहर जा रहे है। कई जगह तो आपको बताए या साथ ले जाए बिना ही जाने लगा/लगी हैं। तो कहीं इसका अर्थ यह‍ तो नहीं कि उन्हें आपका साथ पसंद नहीं। या हो सकता है कि आपकी मौजूदगी में किसी और के साथ इश्क की पींगें बढ़ाने में उन्हें दिक्कत होती हो।

जरूरत से ज्यादा मोबाइल फोन का उपयोग

जब वह मोबाइल फोन का उपयोग ज्यादा करने लगे या फोन पर बात करते समय बहुत ही कम आवाज में या सिर्फ फुसफुसाते हुए बोले। और जब आप उसके करीब जाए तो वह अपने संदेश और आने वाली कॉल को कॉलर आईडी से हटा दें। तो समझ जाइए कि 'मामला गड़बड़ है।'

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‘हाफ गर्लफ्रेंड’ को लेकर चेतन भगत को नोटिस

2014-11-14 04:48:04 admin

पटना : लेखक चेतन भगत की ताजा पुस्तक ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ बिहार के डुमरांव राज परिवार को नागवार गुजरी है. आरोप है कि पुस्तक में उन्हें गलत ढंग से पेश किया गया है.

डुमरांव राज परिवार ने लेखक व प्रकाशक के खिलाफ मानहानि के मुकदमे की धमकी दी है. महाराजा बहादुर कमल सिंह (88) और युवराज चंद्र विजय सिंह सहित राज परिवार ने भगत पर उन्हें बदनाम का आरोप लगाया है. चंद्र विजय सिंह ने कहा, ‘हमारे वकील ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ के लेखक से माफी की मांग करते हुए नोटिस भेज रहे हैं. 

अगर वे माफी नहीं मांगते, तो हम उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा करेंगे.’ साथ ही वह लेखक और प्रकाशक से पुस्तक को बाजार से वापस लेने, इससे परिवार का नाम हटाने तथा यह सुनिश्चित करने के लिए कहेंगे कि अगर पुस्तक पर फिल्म बनायी जाये, तो ये ‘गलतियां’ नहीं दोहरायी जाएं.‘हाफ गर्लफ्रेंड’ एक ग्रामीण युवक और शहर की लड़की के बीच की प्रेम कहानी पर आधारित है. 

इससे पहले भगत ‘फाइव प्वाइंट समवन’, ‘वन नाइट एट द कॉल सेंटर’ तथा ‘द थ्री मिस्टेक्स ऑफ माई लाइफ’ जैसी पुस्तकें लिख चुके हैं. सिंह ने कहा कि भगत ने न तो उनसे या उनके पिता से मुलाकात की और न ही पुस्तक लिखते वक्त परिवार से इजाजत ली. पुस्तक के खिलाफ पश्चिमी बिहार की पूर्व रियासत डुमरांव के निवासियों ने प्रदर्शन करते हुए प्रतियां जलायी थीं और लेखक भगत के पुतले भी फूंके थे. सिंह का आरोप है कि भगत ने पुस्तक में बिहार के लोगों को अंगरेजी बोलने के मामले में अशिक्षित, गंवार व शिष्टाचार विहीन के तौर पर बताया है.

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नार्वे में सूर्य आधी रात तक क्यों चमकता हैं?

2014-11-10 05:50:27 admin

नार्वे में गरमियों में सूर्य मई के मध्य से जुलाई के अन्त तक रात में भी पूरी तरह नहीं छिपता। इस अवधि में रात मे भी काफी उजाला रहता है। खास बात यह है कि सर्दियों के दो महीनों में यह सूर्य के दर्शन ही नहीं होते, आर्थात् पूरी तरह रात रहती है। क्या आप जानते हैं ऐसा क्यों होता है?
          

 

दरअसल, सूर्य अर्धरात्रि में भी उन धु्रवीय प्रदेशों में दिखाई देता है,जहां रात्रि में भी यह क्षितिज के ऊपर ही रहता है, छिपता नहीं है। पृथ्वी का अक्ष अपनी भ्रमण करने की कक्षा के तल से 23.5 अंश झुका हुआ है, इसलिए प्रत्येक गोलार्द्ध गरमी में सूर्य की ओर झुका रहता है, जबकि सर्दियों में यह झुकाव विपरित दिशा में, यानी सूर्य से परे हो जाता है। इस कारण उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवीय प्रदेशों में साल में कुछ समय के लिए सूर्य पूरी तरह नहीं छिपता है, बल्कि अर्धरात्रि में भी दिखता रहता है। जब दक्षिणी ध्रुव प्रदेश में सर्दी का मौसम होता है, तो दिन और रात का पता ही नहीं चलता । वहां केवल अंधेरा-ही-अंधेरा रहता है। इन दिनों (अप्रैल से जुलाई) में उत्तर धु्रवीय प्रदेशों में गरमी होती है और वहां सूर्य 24 घण्टे दिखाई देता है। होता यह है कि सूर्य उदय होता है और धीमी गति से चलता दिखाई देता है। शाम को यह छिपना शुरू होता है, लेकिन क्षितिज के पास पहुंचकर फिर उगना शुरू कर देता है।

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दुनिया रंगीन क्यों दिखती है?

2014-11-10 05:47:55 admin

आंखों को ईश्वर की अनमोल भेंट कहा जाता है। इनके द्वारा हम इस रंग-बिरंगी दुनिया को देख सकते है। आंखों की कीमत वह व्यक्ति भली- भांति जानता है, जिसकी आंखों की रोशनी किसी वजह से चली जाती है। आखिर हमारी आंखों मे ऐसी क्या विशेषता है, जो वे हर चीज को उसके वास्तविक रगं रूप में देख लेती है।

 

हमारी आंखों की रेटीना पर छोटी-छोटी कोशिकाओें की एक परत होती है। इन कोशिकाओं को रॉड्स और कोन्स कहा जाता है। इन कोशिकाओं में ऐसा प्रकाश संवेदी पदार्थ होता है, जो अलग-अलग रंगों का प्रकाश पड़ने पर प्रतिक्रिया दिखाता है। रॉड्स नामक कोशिकाएं सिर्फ ब्लैक एंड व्हाइट प्रकाश के प्रति प्रतिक्रिया दिखाती है, जबकि कोन्स नामक कोशिकाएं विभिन्न रंगों के  प्रकाश के प्रति प्रतिक्रिया दिखाती हैं। जब भी कोन्स कोशिकाओं पर अलग-अलग रंग का प्रकाश पड़ता है, तो उस रंग से सम्बन्धित सूचना मस्तिष्क को भेजती है। इसी के फलस्वरूप हम किसी भी वस्तु की रंगीन छवि देख पाते हैं, लेकिन इन कोशिकाओं की एक विशेषता यह है कि ये सिर्फ चमकीले प्रकाश में ही काम करती है। यही वजह है कि जब प्रकाश कम हो, तब हम कई चीजों को उनसे वास्तविक रंग में नहीं देख पाते।

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शिखर पर पहुंच सकते हैं आप भी...

2014-09-28 04:14:29 admin

सभी लोग अपने करियर को सफल और संतुष्टिजनक बनाना चाहते हैं। शिखर पर भला कौन नहीं पहुंचना चाहता? करियर में सही मुकाम हासिल करने की राह में लोग कई तरह के प्रयोग करते हैं। हालांकि इस प्रक्रिया में उनसे कई तरह की गलतियां भी होती हैं। हम आपको यहां कुछ ऐसे टिप्स दे रहे हैं जिनका ध्यान रखकर आप अपने करियर को सफल और सर्वश्रेष्ठ बना सकते हैं और आपके लिए शिखर पर पहुंचने की राह आसान हो सकती है।

काम के प्रति हो जुनून

आपमें यदि अपने काम के प्रति गहरा जुनून नहीं है, तो सफलता की राह पर बढ़ना आसान नहीं होगा। इसलिए जितनी जल्दी संभव हो, अपने करियर में ऐसा कुछ तलाशें जो आपको प्रेरित करता हो। आप यदि ऐसा कोई काम करते हैं, जिसे करने पर आपकी आंखों में ऊर्जा और उत्साह भरी चमक आ जाती है तो आपके करियर को उज्ज्वल होने से कोई रोक नहीं सकता।

ऊपर ही नहीं, अगल-बगल भी देखें

अक्सर लोग सफलता की ओर बढ़ने का एकमात्र तरीका यह मान लेते हैं कि सीढ़ी पर कदम रखते हुए ऊपर की ओर बढ़ते चला जाए। लेकिन कई बार यह तरीका सही नहीं होता। जब आप सीढ़ी पर वर्टिकल चढ़ते जाते हैं तो अपनी टीम से कट जाते हैं और कई हॉरिजंटल मौकों को गंवा देते हैं। अपने अगल-बगल देखते हुए भी आप काफी कुछ सीख सकते हैं। इस तरह मिलने वाले अवसरों का फायदा उठाएं, अन्यथा यह भी हो सकता है कि जल्दबाजी में आप सीढि़यां चढ़ते जाएं और टॉप पर पहुंचने के बाद ऐसा लगे कि अरे! यह तो हमारी मंजिल थी ही नहीं।

काम का कोई उद्देश्य हो

आपकी मौजूदा भूमिका जो भी हो, उसका एक उद्देश्य होना चाहिए। सफलता की कुंजी यह है कि आज पर फोकस रखते हुए भविष्य के लिए योजनाएं बनाएं। आपको अपनी करियर आकांक्षाओं और मौजूदा जॉब के बीच संतुलन बनाना सीखना होगा। समूची प्रकिया को एंज्वॉय करिए, क्योंकि इसी तरह से सीखा और आगे बढ़ा जा सकता है।

लीडरशिप जरूरी है

किसी सफल करियर को हासिल करने के लिए सबसे जरूरी है, कुशल नेतृत्व का गुण सीखना। ध्यान रहे, यदि आप बहुत गहरी खाई में उतर कर नेतृत्व करने लगते हैं तो आपको ऐसी किसी सुविधाजनक जगह पहुंचने में मुश्किल आएगी जहां से रणनीतिक नेतृत्व कर सकते हों। इसी तरह, बहुत ऊंचाई पर चढ़कर नेतृत्व करने से आप अपनी टीम से कट जाएंगे, अलग-थलग पड़ जाएंगे और आपको सिर्फ अपने लिए नेतृत्व करने वाला समझा जाएगा। एक सफल नेतृत्व और सफर करियर के लिए यह जरूरी है कि आपको अपने कर्मचारियों के बीच समुचित सम्मान मिले। इसके लिए आपको टीम को साथ लेकर चलना सीखना होगा।

एकला न चलें

ध्यान रहे कि करियर का निर्माण कभी भी अकेले दम पर नहीं हो सकता। आप किसी महान शेफ के साथ किचन में जाएं तो देखेंगे कि उसके साथ कई शेफ की पूरी टीम लगी हुई है और इस टीम के पूरे लय में मिलकर काम करने के बाद ही कोई स्वादिष्ट डिश तैयार होती है। इसी तरह बिजनेस या नौकरी में भी सफलता अकेले हासिल नहीं की जा सकती। आपको अपने प्लान को लागू कराने के लिए सक्षम सहकर्मियों, मित्रों आदि की जरूरत होती है। इसके अलावा, आपको समय-समय पर भरोसेमंद लोगों की सलाह की जरूरत भी पड़ती है।

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बर्तन में छुपा सेहत का खजाना

2014-08-25 14:10:22 admin

सेहतमंद खाना पकाने के लिए आप तेल-मसालों पर तो पूरा ध्यान देती हैं, पर क्या आप खाना पकाने के लिए बर्तनों के चुनाव पर भी ध्यान देती हैं? अगर आपका जवाब न है तो आज से ही इस बात पर भी ध्यान देना शुरू कर दें। बर्तन कैसे आपको सेहतमंद बना सकते हैं, बता रही हैं वंदना

खाना पौष्टिक और सेहतमंद हो इसके लिए हम न जाने कितने जतन करते हैं। कम तेल इस्तेमाल से लेकर सब्जियों और दालों को सफाई से धोना, आटा साफ हाथ से गुनना, घर और किचन में साफ-सफाई का खास ख्याल रखना, भोजन की गुणवत्ता, ताजापन, सही मसालों का उपयोग और भी बहुत कुछ हमारी आदत में शुमार हो चुका है। लेकिन एक अहम चीज हम अकसर भूल जाते हैं और वह है हमारे बर्तन। जी हां, भोजन की पौष्टिकता में यह बात भी मायने रखती है कि आखिर उन्हें किस बर्तन में बनाया जा रहा है। आपको शायद मालूम न हो, लेकिन आप जिस धातु के बर्तन में खाना पकाते हैं उसके गुण भोजन में स्वत: ही आ जाते हैं।

डाइटीशियन ईशी खोसला के मुताबिक भोजन पकाते समय बर्तनों का मैटीरियल भी खाने के साथ मिक्स हो जाता है। एल्यूमीनियम, तांबा, लोहा, स्टेनलेस स्टील और टेफलोन बर्तन में इस्तेमाल होने वाली आम सामग्री हैं। बेहतर है कि आप अपने घर के लिए कुकिंग मटेरियल चुनते समय कुछ जरूरी बातों का ख्याल रखें और इसके लिए आपको उन बर्तनों के फायदे नुकसान के बारे में जानकारी होना जरूरी है।

कास्ट लोहे के बर्तन
देखने और उठाने में भारी, महंगे और आसानी से न घिसने वाले ये बर्तन खाना पकाने के लिए सबसे सही पात्र माने जाते हैं। शोधकर्ताओं की माने तो लोहे के बर्तन में खाना बनाने से भोजन में आयरन जैसे जरूरी पोषक तत्व बढ़ जाते है।

एल्यूमीनियम के बर्तन 
एल्यूमीनियम के बर्तन हल्के, मजबूत और गुड हीट कंडक्टर होते हैं। साथ ही इनकी कीमत भी ज्यादा नहीं होती। भारतीय रसोई में एल्यूमीनियम के बर्तन सबसे ज्यादा होते हैं। कुकर से लेकर कड़ाहियां आमतौर पर एल्यूमीनियम की ही बनी होती हैं। एल्यूमीनियम बहुत ही मुलायम और प्रतिक्रियाशील धातु होता है। इसलिए नमक या अम्लीय तत्वों के संपर्क में आते ही उसमें घुलने लगता है। खासकर टमाटर उबालने, इमली, सिरका या किसी अम्लीय भोजन के बनाने जैसे कि सांभर आदि के मामले में यह ज्यादा होता है। इससे खाने का स्वाद भी प्रभावित होता है।

खाने में एल्यूमीनियम होना गंभीर चिंता का विषय है। यह खाने से आयरन और कैल्शियम तत्वों को सोख लेता है। यानी यदि पेट में गया तो शरीर से आयरन और कैल्शियम सोखना शुरू कर देता है। इससे हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। कुछ अल्जाइमर (याद्दाश्त की बीमारी) के मामलों में मस्तिष्क के उत्तकों में भी एल्यूमीनियम के अर्क पाए गए हैं। जिससे यह तो स्पष्ट है कि एल्यूमीनियम के तत्व मानसिक बीमारियों के संभावित कारण भी हो सकते हैं। शरीर में एल्यूमीनियम की मात्रा अधिक हो जाए, तो टीबी और किडनी फेल होने का सबब बन सकता है। यह हमारे लिवर और नर्वस सिस्टम के लिए भी फायदेमंद नहीं होता। शोधकर्ताओं की मानें तो एल्यूमीनियम के बर्तन में चाय, टमाटर प्यूरी, सांभर और चटनी आदि बनाने से बचना चाहिए। इन बर्तनों में खाना जितनी देर तक रहेगा, उसके रसायन भोजन में उतने ही ज्यादा घुलेंगे।

तांबा और पीतल के बर्तन 
कॉपर और पीतल के बर्तन हीट के गुड कंडक्टर होते हैं। इनका इस्तेमाल पुराने जमाने में ज्यादा होता था। ये एसिड और सॉल्ट के साथ प्रक्रिया करते हैं। नेशनल इंस्टीटय़ूट आफ हेल्थ के अनुसार खाने में मौजूद ऑर्गेनिक एसिड, बर्तनों के साथ प्रतिक्रिया करके ज्यादा कॉपर पैदा कर सकता है, जो शरीर के लिए नुकसानदेह होता है। इससे फूड प्वॉयजनिंग भी हो सकती है। इसलिए इनकी टिन से कोटिंग जरूरी है। जिसे कलई भी कहते हैं।

स्टेनलेस स्टील बर्तन
स्टेनलेस स्टील के बर्तन अच्छे, सुरक्षित और किफायती विकल्प हैं। इन्हें साफ करना भी बहुत आसान है। स्टेनलेस स्टील एक मिश्रित धातु है, जो लोहे में कार्बन, क्रोमियम और निकल मिलाकर बनाई जाती है। इस धातु में न तो लोहे की तरह जंग लगता है और न ही पीतल की तरह यह अम्ल आदि से प्रतिक्रिया करती है। इसकी सिर्फ एक कमी है कि इससे बने बर्तन जल्द गर्म हो जाते हैं। इसलिए इन्हें खरीदते वक्त ऐसे बर्तन चुनें जिनके नीचे कॉपर की लेयर लगी हो। लेकिन इसे साफ करते समय सावधानी बरती जानी चाहिए क्योंकि इसकी सतह पर खरोंच आने से क्रोमियम और निकल निकलता है।

नॉन-स्टिक बर्तन 
नॉन-स्टिक बर्तनों की सबसे खास बात यह है कि इनमें तेल की बहुत कम मात्रा या न डालो तो भी खाना पढिया पकता है। नॉन-स्टिकी होने की वजह से इनमें खाना चिपकता भी नहीं। लेकिन नॉन-स्टिक बर्तनों को बहुत ज्यादा गर्म करने या इनकी सतह पर खरोंच आने से कुछ खतरनाक रसायन निकलते हैं। इसलिए विशेषज्ञ हमेशा इन बर्तनों को बहुत ज्यादा गर्म करने या जलते गैस पर छोड़ने की सलाह नहीं देते हैं।

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मोटापे से परेशान बच्चे|

2014-08-24 17:30:06 admin

स्वास्थ्य ठीक न हो, तो बच्चों की कार्य करने, पढ़ने और लिखने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। अगर वजन की दृष्टि से देखें, तो उम्र व लंबाई के अनुसार एक उचित वजन होना जरूरी है। इसके उपरांत यदि वजन ज्यादा है, तो वह मोटापा कहलायेगा, जो बेहतर स्वास्थ्य का सूचक नहीं है।

दुष्प्रभाव

मोटापे के कारण कम उम्र में ही बच्चे की लिपिड प्रोफाइल, ट्राई ग्लिसराइड, हाई ब्लड प्रेशर, इम्पेयर्ड ग्लूकोज टॉलरेन्स और डाइबिटीज आदि रोगों की समस्या उत्पन्न हो सकती है। बच्चा कम उम्र में ही हृदय रोग से ग्रस्त हो सकता है। इससे बचने के लिए अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार बच्चे को ओमेगा 3 फैटी एसिड्स युक्त खाद्य पदार्थ (जैसे अखरोट आदि) खिलाने से इन रोगों से कुछ हद तक बचा जा सकता है।

इसके अलाव मोटापे के बरकरार रहने से बच्चे के लिव का कार्य भी बाधित हो सकता है। इसका कारण नॉन-एल्कोहॅलिक फैटी लिवर डिजीज और भविष्य में एक प्रकार की हेपेटाइटिस और लिवर सिरोसिस जैसी बीमारी भी हो सकती है।

कारण व बचाव

1.मोटापे का कारण सुस्त जीवन- शैली, व्यायाम व आउट डोर खेलों से दूर रहने के साथ-साथ ज्यादा कैलोरीयुक्त भोजन लेना है। देश में पैदल चलने व साइकिल चलाने की बजाय मोटर साइकिल व कारें चलाने को तरजीह दी जाती है। शहर के बहुत बड़े भाग में बच्चों के लिए खेल के मैदानों का अभाव, इस समस्या का बहुत बड़ा कारण है। टेलीविजन, वीडियो गेम्स व कंप्यूटर को बहुत हद तक दोष दिया जा सकता है।

2. बच्चों की डाइट की बात करें, तो माता-पिता उन्हें कम कैलोरी के भोजन के नाम पर अक्सर रूखी-सूखी सब्जियां खिलाने का प्रयास करते हैं, जो बच्चों के पसंद की नहीं होतीं। इस मुद्दे को लेकर घर में कभी-कभी मतभेद खुलकर सामने आ जाते हैं। इस बारे में अभिभावकों को एक सलाह दूंगा। वह यह कि बच्चों को हरी व स्वास्थ्यवर्धक पौष्टिक सब्जियां खिलाने के लिए उनका रूप बदला जा सकता है। जैसे पालक की भुजिया की जगह पालक पनीर बनाकर दिया जाए या उसके लिए घर में बनाये पिच्जा के ऊपर टमाटर की मोटी सतह रखी जाए।

3.बच्चों को मोटापे से बचाने के लिए एक उचित वातावरण भी तैयार करना पड़ता है। जैसे परिवार में वयस्क लोग नियमित व्यायाम व स्वास्थ्यवर्धक भोजन करते हों। याद रखें, बच्चे बताने व पढ़ाने से उतना नहीं सीखते जितना कि उदाहरण से।

(डॉ.निखिल गुप्ता,वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ)

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टीवी धारावाहिक से ख़तरे में है आपकी लव लाइफ

2014-07-11 16:57:36 admin

क्या आपको पता है कि आपकी लव लाइफ परेशानियों में क्यों घिरी है? इसका दोषी टेलीविजन पर आने वाले पारिवारिक एक्शन से भरपूर धारावाहिक हैं, जिसे हर शाम आपका साथी देखता है।

Tv and Biwi

एक नए अध्ययन के मुताबिक, टेलीविजन पर आने वाले हमारे कुछ पसंदीदा धारावाहिकों में प्रेम के लिए कोई जगह नहीं होती, परिणामस्वरूप दर्शकों में प्रेम के प्रति दृष्टिकोण रूखा हो जाता है। 



वैसे लोग जो इन धारावाहिकों को नियमित तौर पर देखते हैं, उनमें हमसफर और स्थायी प्रेम के प्रति विश्वास समय के साथ कम होता जाता है। 



युनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के शोधकर्ताओं ने कहा, ''वैसे दर्शक जो डेटिंग से जुड़ी रियलिटी शो को देखते हैं, वे ज्यादा रोमांटिक होते हैं और सच्चे प्यार में विश्वास करते हैं। 



अध्ययन का उद्देश्य इसकी जांच करना था कि क्या टेलीविजन किसी व्यक्ति के विश्वास प्रणाली पर भी असर डाल सकता है, यहां तक कि अवचेतन मन पर भी। 



शोधकर्ता कहते हैं, ऐसे प्रेमरहित टेलीविजन धारावाहिकों में प्रेम को एक त्रुटि के तौर पर देखा जाता है। इन धारावाहिकों में रिश्ते बहुत ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाते और टिकते हैं, तो उनमें परिपूर्णता नहीं होती। 



यह अध्ययन पत्रिका 'सायकोलॉजी ऑफ पॉप्युलर मीडिया कल्चर' में प्रकाशित हुआ है।

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मधुमेह, मोटापा, रक्तचाप से आप यूं रह सकते हैं दूर

2014-07-11 13:46:39 admin

इन दिनों जीवनशैली से संबंधित बीमारियां खासकर शहरों में लगभग हर किसी को अपनी चपेट में ले रही हैं। आप ऐसी बीमारियों को अपने करीब आने से कैसे रोक सकते हैं, बता रहे हैं पुष्पावती सिंघानिया रिसर्च इंस्टीटय़ूट के विभागाध्यक्ष (गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी) डॉ. राकेश टंडन


Impact-of-diet-on-diabetes-and-employee-health1आज की जीवनशैली के कारण होने वाली बीमारियों में मोटापा, मधुमेह  यानी डायबिटीज, उच्च रक्तचाप यानी हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारियां, यकृत (लीवर) की पुरानी बीमारी, सिरोसिस, कब्ज, गैस से त्रस्त पेट और कैंसर शामिल हैं। इनमें खासकर मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हाइपरलिपिडेमिया चिंता ज्यादा चिंतित करने वाले हैं, क्योंकि मृत्यु के भी बड़े कारक बनते हैं। 


20वीं सदी का आधा समय बीत जाने के बाद डेयरी उत्पादों, मांस, वनस्पति तेलों, फलों के रस और अल्कोहल युक्त पेय पदार्थ का इस्तेमाल बढ़ गया है और स्टार्चयुक्त मुख्य खाद्य पदार्थो जैसे रोटी, आलू, चावल, मक्के का आटा, सब्जियां, सलाद और फलों की खपत में कमी के कारण लोगों के आहार लेने के तरीकों में बड़ा बदलाव आया है।


मोटापा बढ़ा है


राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (2005-06) के अनुसार भारत में 13 प्रतिशत औरतें और 9 प्रतिशत मर्द मोटे हैं या उनका वजन जरूरत से अधिक है। किसी व्यक्ति में मोटापे की मौजूदगी जीवनशैली से संबंधित अन्य बीमारियों के होने की आशंका को बहुत बढ़ा देती है और वे सब मिल कर प्रभावित व्यक्ति की आयु को कम कर देते हैं। 


विश्व की मधुमेह राजधानी 


एक आकलन के अनुसार, भारत में लगभग 61.3 मिलियन यानी 6 करोड़ 13 लाख लोग मधुमेह से पीड़ित हैं।  2011 में पूरे विश्व में मधुमेह के कारण 46 लाख लोग मौत का शिकार हुए। मधुमेह से पीड़ित और मोटे लोगों को यकृत की गंभीर बीमारियों का शिकार होने का खतरा आम लोगों से अधिक होता है, जो अंतत: असमय और अल्पायु में मृत्यु का कारण बन जाता है।


दिल की बीमारी : मृत्यु का बड़ा कारक 


लगभग 74 प्रतिशत शहरी भारतीय दिल के दौरे के खतरे का समना करते हैं। 30 से 49 वर्ष की आयु सीमा के 59 प्रतिशत लोग कोलेस्ट्रॉल के उच्च खतरे वाले स्तर पर हैं और उनमें से 61 प्रतिशत लोगों में ‘अच्छे’ एचडीएल कोलेस्ट्रॉल का स्तर बहुत निम्न होता है।


क्या हैं कारण


अनियंत्रित उच्च रक्तचाप, धूम्रपान, शराब का अत्यधिक सेवन और शारीरिक रूप से निष्क्रिय जीवनशैली अधिक संख्या में दिल के दौरे के अन्य कारणों में से एक है। आज की युवा पीढ़ी के बीच एक गलतफहमी व्याप्त है कि धूम्रपान तनाव से राहत देता है। वस्तुत: यह लंबे समय में व्यक्ति के स्टेमिना को कम करता है, जिससे कई प्रकार की बीमारियां, खासतौर से दीर्घकालिक फेफड़े की बीमारियां, दिल की बीमारी और कैंसर तक हो सकता है। 


बिना अल्कोहल के होने वाली यकृत यानी लीवर की बीमारी 


बढ़े हुए इंसुलिन प्रतिरोध के सहउत्पाद के रूप में अत्यधिक चर्बी (ट्राईग्लिसराइड्स) के कारण यकृत कोशिकाएं अवरुद्घ हो जाती हैं। समय के साथ-साथ इससे यकृत कोशिकाओं में सूजन और जलन हो जाती है, जिस कारण यकृत का सिरोसिस हो जाता है और ऐसे मामलों के कुछ प्रतिशत में यकृत/लीवर कैंसर में बदल जाता है। ऐसा ही अल्कोहल से उत्पन्न चरबीदार यकृत संबंधी बीमारी में होता है।


ऐसी अन्य बीमारियां


तनाव एसिडिटी उत्पन्न करने में मुख्य भूमिका निभाता है। एसिडिटी का दमन करने वाली दवाओं के बावजूद लगातार चली आ रही एसिडिटी की समस्या विटामिन की कमी और भोजन नली के कैंसर का कारण बन सकती है।


रात की पालियों में काम कर रहे लोग विक्षुब्ध जैविक घड़ी की समस्या से पीड़ित रहते हैं, जिससे उन्हें अनिद्रा, 


अपच, एसिडिटी, भूख में कमी, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, उच्च रक्तचाप, मूड में उतार-चढ़ाव और शरीर में दर्द आदि का सामना करना पड़ता है।


क्या हैं उपचार


जीवनशैली संबंधित बीमारियों की शुरुआत होने में वर्षो लगते हैं, लेकिन जब ये बीमारियां हो जाती हैं तो उनसे मुक्ति पाना भी आसान नहीं होता। इससे मुक्ति पाने के लिए अनुशासित जीवन, उपचार और अनेक दवाओं के संयोजन, आहार व्यवस्था और फिजियोथेरेपी की जरूरत पड़ती है।


बचाव के उपाय


अधिकांश जीवनशैली संबंधी बीमारियों से बचा जा सकता है। संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधियां, अल्कोहल, धूम्रपान और नशीली दवाओं के सेवन से दूरी बना कर ऐसी बीमारियों से दूर रहा जा सकता है। प्रतिदिन 10 से 15 मिनट का व्यायाम स्वस्थ बने रहने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।  बच्चों को आउटडोर गतिविधियों में व्यस्त रखें।

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