Home » Life Style » मधुमेह, मोटापा, रक्तचाप से आप यूं रह सकते हैं दूर

इन दिनों जीवनशैली से संबंधित बीमारियां खासकर शहरों में लगभग हर किसी को अपनी चपेट में ले रही हैं। आप ऐसी बीमारियों को अपने करीब आने से कैसे रोक सकते हैं, बता रहे हैं पुष्पावती सिंघानिया रिसर्च इंस्टीटय़ूट के विभागाध्यक्ष (गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी) डॉ. राकेश टंडन


Impact-of-diet-on-diabetes-and-employee-health1आज की जीवनशैली के कारण होने वाली बीमारियों में मोटापा, मधुमेह  यानी डायबिटीज, उच्च रक्तचाप यानी हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारियां, यकृत (लीवर) की पुरानी बीमारी, सिरोसिस, कब्ज, गैस से त्रस्त पेट और कैंसर शामिल हैं। इनमें खासकर मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हाइपरलिपिडेमिया चिंता ज्यादा चिंतित करने वाले हैं, क्योंकि मृत्यु के भी बड़े कारक बनते हैं। 


20वीं सदी का आधा समय बीत जाने के बाद डेयरी उत्पादों, मांस, वनस्पति तेलों, फलों के रस और अल्कोहल युक्त पेय पदार्थ का इस्तेमाल बढ़ गया है और स्टार्चयुक्त मुख्य खाद्य पदार्थो जैसे रोटी, आलू, चावल, मक्के का आटा, सब्जियां, सलाद और फलों की खपत में कमी के कारण लोगों के आहार लेने के तरीकों में बड़ा बदलाव आया है।


मोटापा बढ़ा है


राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (2005-06) के अनुसार भारत में 13 प्रतिशत औरतें और 9 प्रतिशत मर्द मोटे हैं या उनका वजन जरूरत से अधिक है। किसी व्यक्ति में मोटापे की मौजूदगी जीवनशैली से संबंधित अन्य बीमारियों के होने की आशंका को बहुत बढ़ा देती है और वे सब मिल कर प्रभावित व्यक्ति की आयु को कम कर देते हैं। 


विश्व की मधुमेह राजधानी 


एक आकलन के अनुसार, भारत में लगभग 61.3 मिलियन यानी 6 करोड़ 13 लाख लोग मधुमेह से पीड़ित हैं।  2011 में पूरे विश्व में मधुमेह के कारण 46 लाख लोग मौत का शिकार हुए। मधुमेह से पीड़ित और मोटे लोगों को यकृत की गंभीर बीमारियों का शिकार होने का खतरा आम लोगों से अधिक होता है, जो अंतत: असमय और अल्पायु में मृत्यु का कारण बन जाता है।


दिल की बीमारी : मृत्यु का बड़ा कारक 


लगभग 74 प्रतिशत शहरी भारतीय दिल के दौरे के खतरे का समना करते हैं। 30 से 49 वर्ष की आयु सीमा के 59 प्रतिशत लोग कोलेस्ट्रॉल के उच्च खतरे वाले स्तर पर हैं और उनमें से 61 प्रतिशत लोगों में ‘अच्छे’ एचडीएल कोलेस्ट्रॉल का स्तर बहुत निम्न होता है।


क्या हैं कारण


अनियंत्रित उच्च रक्तचाप, धूम्रपान, शराब का अत्यधिक सेवन और शारीरिक रूप से निष्क्रिय जीवनशैली अधिक संख्या में दिल के दौरे के अन्य कारणों में से एक है। आज की युवा पीढ़ी के बीच एक गलतफहमी व्याप्त है कि धूम्रपान तनाव से राहत देता है। वस्तुत: यह लंबे समय में व्यक्ति के स्टेमिना को कम करता है, जिससे कई प्रकार की बीमारियां, खासतौर से दीर्घकालिक फेफड़े की बीमारियां, दिल की बीमारी और कैंसर तक हो सकता है। 


बिना अल्कोहल के होने वाली यकृत यानी लीवर की बीमारी 


बढ़े हुए इंसुलिन प्रतिरोध के सहउत्पाद के रूप में अत्यधिक चर्बी (ट्राईग्लिसराइड्स) के कारण यकृत कोशिकाएं अवरुद्घ हो जाती हैं। समय के साथ-साथ इससे यकृत कोशिकाओं में सूजन और जलन हो जाती है, जिस कारण यकृत का सिरोसिस हो जाता है और ऐसे मामलों के कुछ प्रतिशत में यकृत/लीवर कैंसर में बदल जाता है। ऐसा ही अल्कोहल से उत्पन्न चरबीदार यकृत संबंधी बीमारी में होता है।


ऐसी अन्य बीमारियां


तनाव एसिडिटी उत्पन्न करने में मुख्य भूमिका निभाता है। एसिडिटी का दमन करने वाली दवाओं के बावजूद लगातार चली आ रही एसिडिटी की समस्या विटामिन की कमी और भोजन नली के कैंसर का कारण बन सकती है।


रात की पालियों में काम कर रहे लोग विक्षुब्ध जैविक घड़ी की समस्या से पीड़ित रहते हैं, जिससे उन्हें अनिद्रा, 


अपच, एसिडिटी, भूख में कमी, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, उच्च रक्तचाप, मूड में उतार-चढ़ाव और शरीर में दर्द आदि का सामना करना पड़ता है।


क्या हैं उपचार


जीवनशैली संबंधित बीमारियों की शुरुआत होने में वर्षो लगते हैं, लेकिन जब ये बीमारियां हो जाती हैं तो उनसे मुक्ति पाना भी आसान नहीं होता। इससे मुक्ति पाने के लिए अनुशासित जीवन, उपचार और अनेक दवाओं के संयोजन, आहार व्यवस्था और फिजियोथेरेपी की जरूरत पड़ती है।


बचाव के उपाय


अधिकांश जीवनशैली संबंधी बीमारियों से बचा जा सकता है। संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधियां, अल्कोहल, धूम्रपान और नशीली दवाओं के सेवन से दूरी बना कर ऐसी बीमारियों से दूर रहा जा सकता है। प्रतिदिन 10 से 15 मिनट का व्यायाम स्वस्थ बने रहने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।  बच्चों को आउटडोर गतिविधियों में व्यस्त रखें।

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