Home » National News » भारत में मिलना चाहते हैं गुलाम कश्मीर के लोग

जम्मू। के मुसलमानों को अगर अवसर दिया जाए तो वो पाकिस्तान के बजाय भारत में शामिल होना अधिक पसंद करेंगे। ऐसा कहना है मुस्लिम संगठन अंजुमन मिन्हाज ए रसूल के अध्यक्ष मौलाना सैय्यद अतहर देहलवी का। उन्होंने बताया कि उनका संगठन शांति एवं सांप्रदायिक सौहार्द के लिए काम करता है।  इस बार जम्मू-कश्मीर में चुनाव का उत्साह अपने चरम पर है और इससे 25 साल पुराने रिकार्ड तोड़ दिए हैं। बाढ़ से उपजे हालात में केंद्र सरकार व सेना ने लोगों की दिल से खूब मदद की है जिसके चलते लोगों की सोच में बदलावा आने लगा है।
 
कश्मीर में लोग अपने नुमाइंदे चुनने के लिए उत्साहित हैं तो में भी नब्बे फीसद लोग चाहते हैं कि उनका विलय भारत के साथ हो जाए। कश्मीर दौरे से लौटे अंजुमन मिन्हाजे रसूल के अध्यक्ष मौलाना सईद अथर देहलवी ने रविवार को जम्मू में यह मुद्दा उठाया।
 
मौलाना देहलवी ने कहा कि राज्य में विधानसभा चुनाव इतिहास बदल देंगे। चुनाव से कश्मीर में रायशुमारी और अलगाववाद समर्थकों के साथ आतंकवादी भी खत्म हो जाएंगे। देहलवी ने बताया कि उन्होंने कश्मीर के पुलवामा व शोपियां जिलों के साथ कुछ अन्य इलाकों के दौरे के दौरान पाया कि लोगों की सोच में बदलाव आया है।
 
बाढ़ से उपजे हालात में केंद्र सरकार व सेना की भूमिका से उन्हें अपने-पराए का अंदाजा हो गया है। ऐसे में लोगों में विधानसभा चुनाव को लेकर जोश है। लोग चुनाव बहिष्कार के दावे करने वालों को नकार चुके हैं।
 
कश्मीर में विकास को लोगों की मुख्य मांग करार देते हुए उन्होंने कहा कि वहां अब आइएस, लश्कर-ए-तैयबा के साथ हाफिज सईद, अजहर मसूद व बगदादी की शैतानी टोली की कोई गुंजाइश नहीं है। शांति को दांव पर लगाने के लिए सीमा पार से हो रही कोशिशें बेअसर हो गई हैं। (एजेंसी)
 

 

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