Home » Dharam » छह सूत्र अपनाएं तो गंगा शुद्ध हो जाएं: रामभद्राचार्य

कानपुर, SYC संवाददाता। मां गंगा को अविरल और निर्मल बनाने के लिए छह सूत्र अपनाने की जरूरत है। गंगा की अविरलता के लिए जहां सरकार को आवश्यक कदम उठाना होगा वहीं निर्मलता की जिम्मेदारी जनता को अपने सिर माथे लेनी होगी। गंगा यात्रा में शामिल जनसैलाब Jagat Guru JIऔर उनकी आस्था ने बता दिया कि वह दिन अब दूर नहीं जब मां गंगा की धारा के बीच श्रद्धा की डुबकी और आचमन एक साथ होगा। बुधवार को स्टाक एक्सचेंज सभागार में गंगा जागरण फोरम को संबोधित करते हुए तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामभद्राचार्य ने यह बातें कहीं। उन्होंने हाथ में जल लेकर गंगा को अविरल बनाने का संकल्प भी लिया।

जगद्गुरू ने कहा कि गोमुख से गंगासागर तक गंगा बिना रुके जाए, इसके लिए प्रयास करना होगा। फिर गंगा की निर्मलता को कोई रोक नहीं सकता। महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि युद्ध गंगा के किनारे हुआ था और तब अरबों योद्धाओं का रक्त बहा था। वह प्रदूषण आज के प्रदूषण से हजार गुना ज्यादा था लेकिन गंगा के वेग में प्रदूषण खत्म हो गया। बांध बनाकर गंगा के वेग को रोक दिया गया है। टिहरी बांध बनने के दौरान संतो ने विरोध जरूर किया लेकिन फिर थम गए। अब शांति नहीं क्रांति का वक्त है। अपने चिरपरिचित अंदाज में उन्होंने एक टीवी विज्ञापन का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकारें अब तक उल्लू बनाती रहीं हैं। अब ऐसा नहीं चलेगा। फोरम में आए प्रोफेसर विनोद तारे से कार्ययोजना बनाने के लिए कहा। जगद्गुरू ने शहरवासियों को इस कार्ययोजना के लिए सांसद पर दबाव डालने की सलाह दी और भरोसा दिलाया कि जरुरत पड़ी तो वह खुद सांसद और सरकार से बात करेंगे। गोमुख से गंगासागर तक मां गंगा को अविरल बनाने के लिए हर संभव कदम भी उठाएंगे। गंगा जागरण फोरम में उन्होंने हाथ में जल लेकर इसका संकल्प लिया और गंगा भक्तों को बात नहीं काम करने का संदेश दिया।

छह सूत्र सरकार के लिए

-गंगा पर बने छोटे बांधों को समाप्त किया जाए

-बड़े बांधों से गंगा के जलप्रवाह को मोड़कर वेग को पूर्व रूप दिया जाए

-किसी भी नये बांध को अनुमति न दी जाए

जनता के लिए

-हम स्वयं गंदगी न फैलाएं

-नालों को गंगा जी में जाने से रोकें

-फैक्ट्रियों का गंदा जल गंगा में जाने से रोकें

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