Home » National News » चीनी सामान की घटती बिक्री से खिस्याया चीन

भारतीय कामगार वर्ग मेहनती और कार्यकुशल नहीं'
अखबार का कहना है कि इन्हीं वजहों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेक इन इंडिया जैसी अव्यावहारिक योजनाएं शुरू की हैं, इसीलिए भारतीय संस्थान चाहते हैं कि विदेशी कंपनियां भारत में निवेश करें. अखबार ने कहा है कि भारत में निर्माण परियोजनाएं शुरू कर वहां निवेश करना चीन की कंपनियों के लिए पूरी तरह से आत्मघाती होगा. भारत का कामगार वर्ग मेहनती और कार्यकुशल नहीं है. लेख में कहा गया है कि भारत में दुकानें खोलने की जगह चीन की कंपनियों को चीन में ही अपनी निर्माण इकाइयां लगानी चाहिए.

'भारतीय कुछ नहीं कर सकते'
स्मार्टफोन बनाने वाली दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी कंपनी हुआवेई ने पिछले माह ही भारत में अपनी निर्माण इकाई लगाई है. लेख में कहा गया है कि किसी भी हाल में भारतीय व्यापारी चीनी उत्पादों को खरीदने और उन्हें भारत में बेचने के लिए बड़ी संख्या में चीन आते हैं. यह तरीका चीन के अनुकूल है, इसलिए भारत में कारखाने लगाकर पैसा बर्बाद कर इस व्यवस्था को क्यों बिगाड़ा जाए? अखबार ने लिखा है कि भारतीय अधिकारियों को चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटा के बारे में भौंकने दो. मामले की सच्चाई यही है कि वे इसके बारे में कुछ नहीं कर सकते.

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