Home » National News » बाघों को फिर बेदख़ल करने की साजिश है तैयार…

भोपाल. बाघों के घर में पहले लोगों के कब्जे होने दिए, अब सुरक्षा का हवाला देकर उन्हें उन्हीं के घर से बेदखल करने की तैयारी है। वन विभाग केरवा और कलियासोत क्षेत्र में घूम रहे बाघों को शिफ्ट करने की तैयारी में है। यहां के जंगलों में जा बसे लोगों की सुरक्षा के नाम पर यह कदम उठाया जा रहा है। इसके लिए वन्यप्राणी विभाग को पत्र भी लिखा है। जबकि जानकारों का साफ मत है कि ये जंगल की भूमि है, बाघ का घर है। यहां से इंसानों को हटाना चाहिए। कलियासोत केरवा में ठिकाना बनाने की तैयारी कर रहे दो युवा शावकों को वन विभाग ने यहां से कहीं अन्यत्र शिफ्ट करने के लिए वन्य प्राणी विभाग को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि इन शावकों के लिए न तो यहां पर्याप्त भोजन उपलब्ध है और न ही ठिकाना।

 

भागना ही पड़ेगा…
पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक पीएम लाड का कहना है कि लोगों ने बाघों के घरों पर कब्जे कर लिए हैं। सरकार वोट के लिए मनमाने तरीके से खुद कब्जे करवा रही है। एेसे में अब वन्य जीवों को तो भागना ही पड़ेगा। उनकी जान बचाने का यही एक उपाय है, लेकिन सरकार की एेसी नीतियां ठीक नहीं है। इसके गंभीर परिणाम होंगे।

 

कहीं और जाने की जगह ही नहीं
व न विभाग ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि इन युवा बाघों के लिए कलियासोत केरवा के जंगल में पर्याप्त जगह नहीं है। साथ ही यहां मानव की उपस्थिति भी काफी अधिक है। एेसे में यदि ये बाघ रातापानी, शाजापुर की ओर भी जाते हैं तो उधर भी सेचुरेशन की स्थिति है। अन्य स्थलों पर टेरिटोरियल फाइट हो सकती है। वहीं बाघों को भोजन के लिए कैटल्स पर निर्भर रहना पड़ रहा है। जो कि भोजन का अच्छा स्रोत नहीं है।

 

शावकों को इस जंगल में अपनापन लगता है
बाघिन टी-21 के दो युवा नर शावक टी-121 और टी-122 कलियासोत और केरवा के जंगल में लंबे समय से अपनी उपस्थिति बनाए हुए हैं। चूंकि इनकी मां टी-21 भी लंबे समय तक यहां पर रही है। एेसे में ये दोनो युवा शावक कलियासोत और केरवा के जंगलों में अपनापन महसूस करते हैं। हाल ही में अपनी मां से अलग हुए ये शावक उक्त स्थान को अपना स्थायी ठिकाना बना सकते हैं।

 

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