Home » National News » बड़ रही है हर वर्ष मंडपों की संख्या भक्ति या व्यापार ?

 हर शहर में प्रति वर्ष स्थापितmata

 होने वाले गणेश और दुर्गा पूजा मंडपों की संख्या निरंतर बड़ रही है  इस बात को लेकर दुखी होना चाहिए या खुश होना चाहिए| जानिए क्यों

 

लगभग आधे फर्लांग से भी काम की दुरी पर एक दुसरे की तरफ पीठ किये बने पंडापो का क्या अर्थ है   क्या अचनक लोगो में भक्ति इतनी बड़गई है ? अथवा लोगो में वेमनस्यता इतनी बड़ गई की आधे फर्लांग के दरमियान रहेने वाले लोग एक पंडाल में एक साथ पूजा अर्चना नहीं कर सकते हर पंडाल में ? कान फ़ोड़ू शोर होता है , आरती के वक्त लोगोकी घटती संख्या यहाँ तो नहीं बताती की धर्म की और रुझान बार गया है इस तरहके दिख्वो की वजाह यदि शांति से बेठ कर अपने धर्मथो का अध्यन मनन किया जाय तो समाज की उनत्ती सर्वथा तय है |

 

हम कोई धर्म विरोधी नहीं है किन्तु नो और ग्यारा दिनों की अर्धना के पश्चात् जिस तरहसे देवी दुर्गा और गणेश जी की मूर्तियों को जलाशयों में जिस तरहसे पटका जाता है ,याद रहे इसे सिराना नहीं कहेते उसे देखकर बोहोत दुःख पोहोचता है सबके विचार हेतु हम ये समाचार प्रस्तुत कर रहे है क्या एसा करके हम अपने धर्म को कितनी ऊचाइयो पर लेजाराहे है यहाँ ये याद रहे अधिकतर जलाशयों में गटर का पानी छड़ा जाता है  ऐसे पानी में अपने भगवन को विसर्जित करके हमे कोनसा पुण्य लाभ मिलानेवाला है |

पंडालो में भजन पूजन होता बोहोत काम मिलता है जिसका जिक्र हम पहेले भी कर चुके है क्या हम अपने ही धर्म का अनादार कर रहे है ? 

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