Home » National News » मसर्रत गिरफ्तार , देशद्रोह का चल सकता मुकदमा

kuttaकश्मीरी अलगाववादी नेता मसर्रत आलम को आज सुबह गिरफ्तार कर लिया गया। मसर्रत के समर्थकों ने बुधवार को एक रैली में पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाये थे, साथ ही पाकिस्तानी झंडे भी लहराये थे। आलम को कल रात नजरबंद किया गया था और सुबह उसे गिरफ्तार कर लिया गया। हुर्रियत कांफ्रेंस के कट्टरपंथी धडे के अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी और अन्य कुछ अलगाववादी नेताओं को कश्मीर घाटी में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति बनाये रखने के लिए कल रात से ही घर पर नजरबंद कर दिया गया था।

जब मसर्रत को पुलिस लेकर जा रही थी, तब उसने कहा कि उसकी गिरफ्तारी नई बात नहीं है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर में ताकत के बल पर शासन चलाया जा रहा है। उसने कहा जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी ध्वज लहराना और आजादी के समर्थन में नारे लगाना नई बात नहीं है। यह 1947 से होता आ रहा है।

गत 13 अप्रैल को त्राल में सेना की कार्रवाई में कथित रूप से दो युवकों के मारे जाने की घटना के खिलाफ हुर्रियत कांफ्रेंस ने आज 'त्राल चलो' का आह्वान किया था। हुर्रियत कांफ्रेंस के कट्टरपंथी धडे के प्रवक्ता ने बताया कि गत 15 अप्रैल को नई दिल्ली से यहां लौटे गिलानी को कल त्राल में होने वाली रैली को संबोधित करने से रोकने के लिए रात से ही नजरबंद रखा गया है। प्रवक्ता ने बताया कि गिलानी के हैदरपोरा स्थित आवास के बाहर बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों और पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।

प्रवक्ता ने बताया कि पुलिस के एक अधिकारी ने सूचित किया है कि गिलानी अगले आदेशों तक घर से बाहर नहीं जा सकते है। प्रवक्ता ने बताया कि पिछले छह वर्ष में गिलानी ज्यादातर समय तक नजरबंद ही रहे हैं। गिलानी को इन वर्षों के दौरान शुक्रवार और ईद की नमाज अदा करने के लिए मस्जिदों में जाने की अनुमति भी नहीं दी गई। प्रवक्ता ने बताया कि मसर्रत आलम को कल रात से नजरबंद किया गया और उनके घर के बाहर सुरक्षा बलों को तैनात कर दिया गया था और आज सुबह उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

मसर्रत आलम को वर्ष 2010 से जन सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया था और हाल में उसे रिहा किया गया था। वर्ष 2010 में मसर्रत ने विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था, जिसमे करीब 120 लोग मारे गये थे। मसर्रत की रिहाई पर हालांकि केन्द्र सरकार, भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस ने कडी प्रतिक्रिया दी थी। गत 15 अप्रैल को हैदरपोरा में पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाने और पाकिस्तानी झंडे फहराने के लिए गैर कानूनी गतिविधी अधिनियम के तहत गिलानी और मसर्रत आलम के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

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