Home » Business » यह है वो दस भारतीय कम्पनी जिन्होंने किये कमीयाबी के सौ साल पुरे|

नई दिल्ली. दो विश्व युद्ध, मंदी, आजादी की लड़ाई, लाइसेंस राज और भी न जाने क्या-क्या हो चुका है पिछले 100 सालों में, लेकिन क्या आज भी ऐसा कोई है, जिसने ये सब देखा होगा। जी हां, आज SYC News आपको बता रहा है ऐसी 10 कंपनियों के बारे में, जिन्होंने ये सब देखा और सहा। इन सबके बावजूद ये कंपनियां आगे बढ़ती रहीं और आज भी कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ रही हैं।
 
आइए जानते हैं ऐसी ही 10 कंपनियों के बारे में, जो पिछले 100 सालों से बिजनेस कर रही हैं-
 
1- ब्रिटानिया
 
ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड फूड प्रोडक्ट्स कंपनी है। इस कंपनी की स्थापना 1892 में हुई थी। इसे पश्चिम बंगाल के गुप्ता परिवार ने 295 रुपए के निवेश से शुरू किया था। यह भारत की पहली ऐसी बिस्किट कंपनी है, जिसने ओवन का इस्तेमाल किया।
britannia
ये हैं ब्रिटानिया के प्रोडक्ट्स
 
ब्रिटानिया कंपनी बिस्किट, ब्रेड, केक, रस्क, दूध, मक्खन, घी, दही आदि में बिजनेस करती है। कंपनी का रेवेन्यू 46.70 अरब रुपए है। आपको बता दें कि इस कंपनी ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान सैनिकों को बिस्किट की सप्लाई की थी।
 
 
2- जेस्सोप एंड कंपनी
 
1788 में ब्रिटिश इंजीनियर विलियम जेस्सोप ने इसकी स्थापना की थी। इसे पहले ब्रीन एंड कंपनी के नाम से जाना जाता था। यह कंपनी करीब 226 साल पहले कोलकाता से शुरू हुई थी। यह पहली ऐसी कंपनी है, जिसने लखनऊ में लोहे का पुल और वेस्ट बंगाल में हावड़ा ब्रिज बनाया था। कंपनी की कुल इनकम 7832 लाख रुपए थी।
 
अब शामिल हो चुकी है रुइया ग्रुप में
 
फिलहाल यह कंपनी रुइया ग्रुप में शामिल हो चुकी है। आपको बता दें कि रुइया ग्रुप के चेयरमैन पवन के रुइया हैं। कंपनी रेलवे वैगन, क्रेन, कन्स्ट्रक्शन इक्विपमेंट आदि में काम करती हैं।
 
3- सेंचुरी टेक्सटाइल्स एंड इंडस्ट्रीज
 
सेंचुरी इंडस्ट्रीज की स्थापना नूसोरजी. एन. वाडिया ने 1897 में की थी। इस समय यह कंपनी सेन्चुरी टेक्सटाइल लिमिटेड के नाम से शुरू हुई थी। आपको बता दें कि नूसोरजी बॉम्बे डाइंग के मालिक नुस्ली वाडिया के परदादा हैं। अमेरिकी गृह युद्ध के दौरान इस कंपनी ने काफी कारोबार बढ़ाया। कंपनी का कुल रेवेन्यू 2010 लगभग 4543.18 करोड़ रुपए है।
 
बिरला ग्रुप ने खरीदा
 
तीन दशक बाद 1951 में इसे आर. डी. बिरला ने खरीद लिया। इस समय कंपनी के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला और प्रेसिडेंट आर के डालमिया हैं। कंपनी फैब्रिक, डिजाइनर कपड़े, डेनिम, कॉस्मेटिक्स, इंजीनियरिंग फाइल जैसे प्रोडक्ट्स बनाती है।
 
4- टीवीएस
 
टीवीएस कंपनी की शुरुआत 1911 में मदुरई में हुई थी, जिसे टी. सुंदरम अय्यर ने शुरू किया था। आपको बता दें कि इस कंपनी की जब tvsस्थापना हुई थी तो आम लोगों के पास कारें नहीं होती थीं। बसों में सफर करने वालों को बाइक मुहैया कराने का श्रेय इसी कंपनी को जाता है। कंपनी का कुल रेवेन्यू 2013 के अनुसार लगभग 70.89 अरब रुपए है।
 
ये हैं कंपनी के प्रोडक्ट
 
कंपनी इस समय टू व्हीलर और थ्री व्हीलर गाड़ियां बनाती है। इसके चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन हैं। कंपनी मोटरसाइकिल, स्कूटर, ऑटो रिक्शा और स्पेयर पार्ट्स बनाती है।
 
5- डाबर
 
dabarडाबर भारत की सबसे बड़ी आयुर्वेदिक दवाएं और अन्य प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी है। इसकी स्थापना 1884 में एक फिजिशियन डॉ. एसके बर्मन के द्वारा पश्चिम बंगाल में की गई थी। भारतीय कॉरपोरेट जगत में डाबर का नाम 100 साल से ज्यादा पुराना हो चुका है। कंपनी का कुल रेवेन्यू 2013 के अनुसार लगभग 61.46 अरब रुपए है।
 
प्रोडक्ट
 
कंपनी के चेयरमैन डॉ. आनंद बर्मन, वाइस चेयरमैन अमित बर्मन और सीईओ सुनील बर्मन हैं। कंपनी डाबर आंवला, डाबर च्यवनप्रास, वाटिका, डाबर हनी, फेम, हाजमोला और रीयलगो जैसे प्रोडक्ट बनाती है।
 
6- आईटीसी
 
इसकी शुरुआत एक ब्रिटिश कंपनी ने 1910 में की थी। करीब 100 साल पहले शुरू हुई आईटीसी का नाम उस समय इम्पीरियल टोबैको था, जिसने डनहील और केंट नाम से दो चर्चित ब्रांड पेश किए थे। आज कंपनी के प्रोडक्ट्स करोड़ों लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। आईटीसी सिगरेट बनाने वाली कंपनी की अपनी इमेज बदलने में कामयाब रही है। साल 1969 में अजित नरायण हक्सर ने इसे खरीदा और 1974 में इसका नाम आईटीसी रखा। कंपनी का कुल रेवेन्यू 2013 के अनुसार लगभग 45,102 करोड़ रुपए है।
 
कामयाबी का पर्याय
 
=> कंपनी का ई-चौपाल इनीशिएटिव हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में केस स्टडी के तौर पर शामिल।
 
=> मुनाफे के लिहाज से प्राइवेट सेक्टर की पांचवीं सबसे बड़ी कंपनी है आईटीसी।
 
=> दुनिया की दिग्गज 10 एफएमसीजी कंपनियों की लिस्ट में शुमार है आईटीसी का नाम।
 
=> डाइवर्सिफिकेशन आइडिया पर काम करने के लिए 55 लोगों की मजबूत रिसर्च और डेवलपमेंट टीम।
 
7- टाटा स्टील
 
tata steelटाटा आयरन एंड स्टील कंपनी की शुरुआत दोराबजी टाटा के द्वारा 25 अगस्त 1907 में की गई थी, जो आज दुनिया की सबसे बड़ी स्टील निर्माताओं में से एक है। यह कंपनी दोराबजी टाटा ने अपने पिता जमशेदजी की टाटा ग्रुप के एक पार्ट के तौर पर शुरू की थी। कंपनी का नाम पहले टिस्को (TISCO) हुआ करता था, जिसे 2005 में बदलकर टाटा स्टील कर दिया गया।
 
प्रोडक्ट
 
इस समय कंपनी के चेयरमैन साइरस पलौन्जी मिस्त्री हैं और मैनेजिंग डायरेक्टर टी. वी. नरेन्द्रन हैं। कंपनी स्टील, फ्लैट स्टील प्रोडक्ट्स, लॉन्ग स्टील प्रोडक्ट्स, वायर प्रोडक्ट्स, प्लेट्स आदि बनाती है। कंपनी का कुल रेवेन्यू लगभग 1500 अरब रुपए है।
 
8- गोदरेज
 
गोदरेज ग्रुप का मुख्यालय मुंबई में है, जिसे गोदरेज फैमिली द्वारा मैनेज किया जाता है। इसकी स्थापना अर्देशिर (Ardeshir) गोदरेज और पिरोजशा (Pirojsha) गोदरेज ने 1897 में की थी। 1991 में कंपनी ने फूड बिजनेस शुरू किया।
 
गोदरेज रीयल एस्टेट, एफएमसीजी, इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग, होम अप्लाएंसेज, फर्नीचर, सिक्युरिटी, एग्री प्रोडक्ट आदि में बिजनेस करती है। कंपनी का कुल रेवेन्यू 2013 के आंकड़ों के अनुसार करीब 216 अरब रुपए है।
 
9- किर्लोस्कर
 
kirloskarयह कंपनी 1888 में किर्लोस्कर ब्रदर्स लिमिटेड के नाम से शुरू की गई थी, जो भारत की सबसे बड़ी पम्प और वॉल्व निर्माता कंपनी है। कंपनी का मुख्यालय पुणे में है। इसके चेयरमैन और एमडी संजय किर्लोस्कर हैं। 2012 के आंकड़ों के अनुसार कंपनी का कुल रिवेन्यू लगभग 153 अरब रुपए है।
 
प्रोडक्ट
 
कंपनी पम्प, इंजन, कंप्रेसर, वॉल्व, पिग आयरन, कन्स्ट्रक्शन, ट्रांसमिशन जैसे प्रोडक्ट बनाती है। कंपनी टोयोटा के साथ ज्वाइंट वेंचर के जरिए ऑटोमोबाइल सेक्शन में भी बिजनेस करती है।
 
10- शालीमार पेंट्स
 
शालीमार पेंट्स पेंट बनाने वाली कंपनी है, जिसकी स्थापना 1902 में हुई थी। आपको बता दें कि इसकी स्थापना ब्रिटिश एंटरप्रेन्योर एएन टर्नर और एसी राइट ने की थी। उस समय इसका नाम शालीमार पेंट्स कलर एंड वार्निश लिमिटेड था। कंपनी का मुख्यालय मुंबई में है।
कंपनी के प्रमुख लोगों में रतन जिंदल, गिरीश झुनझुनवाला और समीर नागपाल हैं। कंपनी का कुल रेवेन्यू 367.3 करोड़ रुपए है।

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