Home » Entertainment » फिल्म ‘पीके’ समीक्षा: मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान हर मायने में ‘परफेक्ट’, मनोरंजन के हर सांचे में फिट

मुंबई: इस साल की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'पीके' रिलीज हो गई है। यह फिल्म उम्मीद से ज्यादा खरी उतरती नजर आ रही है। आमिर खान की यह बॉलीवुड की पहली फिल्म है जिसके बनने में दो साल से ज्यादा का वक्त लगा है। आमिर ने फिल्म में यह साबित कर दिखाया है कि उन्हें एक्टिंग का स्कूल यूं ही नहीं कहा जाता। फिल्म के हर सीन में उन्होंने अपनी अदाकारी का बेहतरीन प्रदर्शन किया है। पहली बार आमिर इस फिल्म में ह्यूमर के साथ कई रंगों को बिखेरते नजर आए है। कुल मिलाकर यह एक परफेक्ट फिल्म कही जा सकती है।

 

'पीके' एक अति संवेदनशील मुद्दे पर आधारित फिल्म है। फिल्म दर्शकों का खूब मनोरंजन करती है और मन में कुछ ऐसे सवाल छोड़ देती है, जिसे नजर-अंदाज नहीं किया जा सकता है।

क्रांतिकारी और निडर संवादो से राजकुमार हिरानी की फिल्म 'पीके' भगवान और धर्म-कर्म के नाम पर चल रहे धार्मिक उद्योगों पर सवालिया निशान लगाती है। चोट करती है, प्रहार करती है। यह फिल्म सही मायने में हर नजरिए से  मनोरंजक खूबसूरत है। आमिर खान, राजकुमार हिरानी और विधु विनोद चोपड़ा की तिकड़ी ने एक बार से दर्शकों के सामने एंटरटेनमेंट और 'मैसेज फिल्म' का शानदार तोहफा पेश किया है।

कुछ लोगों की प्रतिक्रिया आई है कि 3 इडियट्स के बाद पीके फिल्म आमिर की बेस्ट फिल्म है। फिल्म में आमिर खान के अलावा अनुष्का शर्मा और संजय दत्त मुख्य भूमिका में हैं। साथ ही इस फिल्म में सुशांत सिंह राजपूत, बोमन इरानी, सौरभ शुक्ला , मोनाली ठाकुर और राम सेठी भी फिल्म में अहम किरदार निभा रहे हैं।

पीके फिल्म की कहानी आमिर खान के किरदार पीके के इर्द-गिर्द घूमती है। पीके एक अंजान शख्स है जो कि शहर में भटकता फिर रहा है। उसके सवाल बड़े अजीब है। वह लोगों से इस प्रकार के सवाल करता है जो पहले किसी ने उनसे नहीं पूछे। पीके यानी आमिर खान एक एलियन है। यह एलियन शानदार और फर्राटेदार भोजपुरी भी बोलता है। इसके पास सवालों का बड़ा भंडार है।

जब पीके का यान धरती पर उतरता है और वह बाहर आता है। वह खुद को एक नई दुनिया में देखकर हैरत में पड़ जाता है। इसी दौरान पीके का लॉकेट कोई चुरा लेता है। उसके सामने बड़ी मुसीबत खड़ी हो जाती है क्योंकि इसी लॉकेट के जरिए वह अपने ग्रह के संपर्क में रह सकता था।

पीके अपने लॉकेट को खूब तलाशता है लेकिन वह उसे नहीं मिलता। इसी सिलसिले में वह एक शहर में दाखिल होता है और यहां उसकी मुलाकात एक टीवी रिपोर्टर जगत जननी (अनुष्का शर्मा) से होती है। फिल्म की कहानी आगे बढ़ती है। धीरे-धीरे पीके की बातों का लोगों पर असर पड़ता है और उसके बाद….। उसके सवाल लोगों को कुछ सोचने पर विवश करते है।
 
पीके कोई मसाला फिल्म नहीं है। दर्शकों को हर फ्रेम में आनंद आता है। फिल्म काफी कसी हुई है। स्क्रिप्ट में पैनापन है। पटकथा लाजवाब है। फिल्म की पटकथा हिरानी ने अपने दोस्त अजिताभ जोशी के साथ मिलकर लिखी है जो कही भी नहीं भटकती है। फिल्म के हर सीन को राजकुमार हिरानी ने नए आयाम से सजाने की कोशिश की है जिसमें वह पूरी तरह कामयाब हुए है।

अदाकारी की बात करे तो आमिर खान ने दिखा दिया है कि वह शानदार अभिनेता हर मायने में है और उनका कोई सानी नहीं है । आमिर ने अविस्मरणीय अभिनय किया है। आमिर खान फिल्म में परफेक्ट अभिनय करते दिखे है। उन्होंने ह्यूमर का जो एक्टिंग फ्लेवर फिल्म में डाला है वह लाजवाब है। पीके अनुष्का शर्मा की अब तक की बेस्ट परफॉर्मेंस फिल्म मानी जा रही है। सुशांत सिंह राजपूत बहुत फ्रेश लगते हैं। अनुष्का के साथ उनकी जोड़ी अच्छी बन पड़ी है।

फिल्म का संगीत पक्ष भी लाजलाब है। चार कदम …और टिंगा-टिंगा नंगा पुंगा…गाना बेहतर बन पड़ा है। इस फिल्म का सबसे बेहतरीन और मेलॉडियस गाना है। चार कदम बस चार कदम….। यह गाना बेल्जियम के ब्रूज्स में फिल्माया गया है। अबतक किसी भी हिंदी फिल्म में इस लोकेशन का इस्तेमाल नहीं किया गया है। यह स्वानंद किरकिरे की लिखी कविता है जो उन्होंने फेसबुक पर डाली थी। फिल्म के निर्देशक राजकुमार हिरानी को यह इतनी पसंद आई कि उन्होंने बिना बदलाव किए इसे फिल्म के गाना के रूप में शामिल किया। यह गाना अनुष्का और सुशांत सिंह राजपूत पर फिल्माया गया है जिसमें सिंगर शान और श्रेया घोषाल ने अपनी मखमली आवाज दी है।

 

 

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