Home » Dharam » व्रत-त्यौहार: 8 दिसंबर से 14 दिसंबर 2014

अंगारक गणेश संकष्ट चतुर्थी, 9 दिसंबर, मंगलवार

इस साल अंगारक संकष्ट चतुर्थी का व्रत तीन बार रखा जा रहा गया। पहला 18 फरवरी 2014 को, दूसरा 15 जुलाई 2014 और तीसरा आगामी 9 दिसंबर को आने वाला है। मंगलवार के दिन आने वाली चतुर्थी को अंगारक चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि जो लोग श्री गणेश अंगार की संकष्ट चतुर्थी के व्रत का पालन करते हैं उन्हें भगवान गणेश सभी कष्टों से मुक्ति दिला देते हैं। यह व्रत न केवल भगवान गणेश की कृपा प्रदान करता है अपितु मंगल देव की भी अपार कृपा का पात्र बनाता है 

इस व्रत के विषय में पुराणों में उल्लेख करते हुए कहा गया है कि मंगलवार का चतुर्थी के साथ संयोग भक्तों के लिए विशेष कृपा देने वाला होता है। पुराणों के अनुसार एक बार मंगल देव ने गणेशजी की कृपा पाने के लिए उनकी कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान गणेश ने उन्हें दर्शन दिए और कहा कि मृत्युलोक में जो भी तुम्हारा व्रत रखेगा उस पर मेरी और तुम्हारी विशेष कृपा होगी और वह सब प्रकार के कष्टों से मुक्त हो जाएगा। शास्त्रों में गणेश जी को सब देवताओं में प्रथम पूज्य माना गया है और उन्हें बुद्धि या विवेक का देवता वर्णित किया गया है।



इस दिन गणेशजी का व्रत रखने वाले उपासक को सुबह उठकर स्नान के बाद भगवान का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए। संकल्प लेते समय "अहं सर्वकर्मसिद्धये सिद्धिविनायकपूजनं करिष्यामि" मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। व्रतधारी को एक कलश में पानी भरकर उसके मुंह पर कोरा कपड़ा बांधकर उसके ऊपर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए। व्रतधारी को पूरा दिन निराहार रहना चाहिए और शाम को सूर्यास्त के बाद पूरे विधि विधान के साथ भगवान गणेश की पूजा और आरती करनी चाहिए। रात्रि में चंद्रमा के उदय होने के बाद अर्घ्य देना चाहिए। जहां तक संभव हो पूरा दिन ' ओम् गं गौं गणपतये नम:' का जाप करते रहना चाहिए।

कालाष्टमी, 14 दिसंबर, रविवार

कालाष्टमी को काला अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। प्रत्येक मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन इसे मनाया जाता है। कालभैरव के भक्त हर कालाष्टमी के दिन उनकी पूजा और व्रत करते हैं। ऐसा विश्वास है कि काल भैरव का व्रत रखने वाले भक्तों के सभी कष्ट इस व्रत को रखने से समाप्त हो जाते हैं। सबसे मुख्य कालाष्टमी को कालभैरव जयंती के नाम से जाना जाता है।

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