Home » State Special » आई कैंप या आंख फोड़वा कैंप, 16 लोगों की आंखें गईं

अमृतसर। पंजाब के गुरदासपुर में 10 दिन पहले एनजीओ की तरफ से लगाए गए आई कैंप में ऑपरेशन के बाद 16 लोगों की आंखों की रोशनी चली गई है। इस मामले के सामने आने के बाद पूरे पंजाब में हड़कंप मच गया है। बता दें कि इस आई कैंप में कुल 60 लोगों को मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ था। जिन लोगों की आंखें गई हैं उनमें से 16 अमृतसर के हैं। जबकि लोगों का कहना है कि कुछ और लोग भी हैं जिनकी आंखों की रोशनी चली गई है। मोतिया बंद के ऑपरेशन के लिए ये आई कैंप 10 दिन पहले गुरदासपुर के घुमन गांव में लगा था। प्रशासन ने इस मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। उन डॉक्टर की तलाश की जा रही है जिन्होंने ऑपरेशन किया था।

 

अस्पताल के बिस्तर पर दर्द से कराह रहे ये बुजुर्ग हमारे देश के मेडिकल सिस्टम को करारा तमाचा मार रहे हैं। उम्र इनके लिए पहले ही बड़ी चुनौती थी ही। अब इनकी बाकी की जिंदगी को भी डॉक्टरों की लापरवाही ने बर्बाद कर दिया है। बुरी तरह परेशान ये लोग अब तक खुद को यकीन नहीं दिला पाए हैं कि अब इन्हें कभी दिखाई नहीं देगा। दरअसल करीब दस दिन पहले इन सभी ने गुरदासपुर के एक नेत्र शिविर में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराया था। लेकिन ऑपरेशन होने के कुछ ही घंटों के भीतर इनकी आंखों में दर्द होने लगा। ये फिर अस्पताल भागे, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। इन जैसे कई लोग अब हमेशा के लिए अपनी आंख खो चुके हैं।

 

प्रशासन का कहना है कि जिन 60 लोगों की आंख गई है, उनमें से 16 लोग अमृतसर और आसपास के गांवों के थे। जबकि बाकी गुरदासपुर के हैं। सभी को अमृतसर और गुरदासपुर के अलग-अलग सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इन लोगों का इलाज कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि इनकी आंखों की रौशनी अब कभी भी वापस नहीं आ पाएगी।

 

आपको बता दें कि गुरदारपुर में लगा मेडिकल कैंप एक गैर-सरकारी संस्था ने लगवाया था। लेकिन कैंप में सफाई पर जरा भी ध्यान नहीं दिया गया। यहां तक की नेत्र शिविर लगाने के लिए प्रशासन से जरूरी इजाजत भी नहीं ली गई थी। अब प्रशासन ने पूरे मामले की जांच का आदेश दे दिया है। नेत्र शिविर लगवाने वालों और मोतियाबिंद का ऑपरेशन करने वाले डॉक्टरों की भी तलाश की जा रही है।

 

प्रशासन की तैयारी है कि मेडिकल कैंप लगाने वालों पर आपराधिक केस दर्ज किया जाए। जाहिर है, गुरदासपुर में मेडिकल कैंप लगने वाला है। इसकी खबर प्रशासन को नहीं थी। लापरवाही के चलते लोगों की आंख जाने के बाद प्रशासन की भी नींद टूटी। अब प्रशासन ऐसे लोगों का अमृतसर-गुरदासपुर के अस्पतालों में मुफ्त इलाज करवा रहा है।

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