Home » State Special » करोड़ों के चंदे पर बहाल हुए थे यादव सिंह

नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना अथॉरिटी के पूर्व चीफ इंजिनियर यादव सिंह का पहला लॉकर सोमवार को खोला गया। आयकर विभाग के सूत्रों के मुताबिक, 2013 में यादव सिंह की अथॉरिटी में वापसी के लिए किन-किन अधिकारियों, इंजिनियरों और ठेकेदारों ने चंदा दिया था, उनके नाम व चंदे का ब्योरा लॉकर से मिला है। यह लॉकर दिल्ली के पंजाब नैशनल बैंक का है।



बहाली के लिए दी रकम करोड़ों में थी। इससे लखनऊ के कुछ आईएएस अधिकारियों से लेकर नोएडा तक के अधिकारियों और बिल्डरों में हड़कंप मचा हुआ है। लॉकर से शेयरों में निवेश की डीटेल्स, बोगस कंपनियों के दस्तावेज, 40 कंपनियों के रिकॉर्ड भी मिले हैं। शुक्रवार को यादव सिंह के 13 लॉकर नई दिल्ली, गाजियाबाद व नोएडा में सील किए गए थे। 

 

 

लॉकर खोलने की प्रक्रिया सोमवार को बैंक का कामकाज बंद होने के बाद तीन बजे से शुरू की गई। इनकम टैक्स अफसरों के सर्च वॉरंरट दिखाने के बाद बैंक मैनेजर की उपस्थिति में लॉकर खोला गया। लॉकर से मिले दस्तावेज की आयकर अधिकारियों ने शुरुआती पड़ताल की। इसके बाद दस्तावेज का पंचनामा तैयार किया। इस सबमें करीब चार घंटे लगे। सूत्रों का कहना है कि लॉकर खोलने की प्रक्रिया काफी लंबी है, ऐसे में बाकी 12 लॉकरों की पड़ताल करने में वक्त लगेगा। आयकर विभाग के डीजी इंवेस्टिगेशन कृष्णा सैनी भी एनसीआर में मौजूद हैं और पूरी प्रक्रिया की निगरानी खुद कर रहे हैं। 



रेड कॉर्नर नोटिस और विदेश में भी फरारी के बाद 2013 में जब यादव सिंह की वापसी नोएडा में हुई, तो बहाली यूं ही नहीं थी। इसके पीछे नेता, अधिकारियों और प्राधिकरण के कुछ इंजिनियरों का मजबूत गठजोड़ था। शासन में बैठे एक शीर्ष अधिकारी की मानें तो यादव सिंह बहाली के लिए नोएडा के कई इंजीनियरों ने करोड़ों का चंदा इक्ट्ठा किया था। 



सीबी-सीआईडी जांच बंद होने के बाद एक सीनियर आईएएस के माध्यम से यादव सिंह की बहाली की डील तय हुई थी। जानकार तो यहां तक बताते हैं कि पूरे खेल को दिल्ली के पांच सितारा होटल में बैठकर अंजाम दिया गया। इसमें एक बड़े राजनेता ने भी पैरवी की थी। इसी के बाद यादव सिंह की बहाली हुई। 

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