Home » Dharam » मंगल कभी नही करता अमंगल

मंगल भूमिपुत्र है, मंगल कभी अमंगल नही करता। अमूमन जन्म कुंडलियों में ग्रहों की सही विवेचना नहीं होने के कारण मंगल दोष की स्थिति बन जाती है। इस वजह से अच्छे रिश्ते नहीं हो पाते हैं। प्रायः कम्प्यूटर से कुंडली मिलाने पर 90 प्रतिशत कुंडलियों में मांगलिक दोष बताया जाता है।

लेकिन कुंडली का गहराई से अध्ययन करने पर पता चलता है कि उसमे मंगल का दोष है ही नहीं। इसीलिए मंगल उनके जीवन को मंगलकारी बनाएगा ।मंगल की भ्रान्तियों को स्वयं दूर कर सही वर-कन्या का चयन करना चाहिए।

ऐसे होता है मंगल दोष का समाधान

विवाह के संदर्भ में वर एवं कन्या के माता-पिता मंगल दोष के भय से हमेशा घबराए हुए रहते हैं। जनमानस में मंगल दोष का भय इतना अधिक व्याप्त है, कि वर-कन्या के माता-पिता मांगलिक वर-कन्या खोजते रहते हैं, इस कारण वर-कन्या के विवाह में विलम्ब होता है।

क्योंकि मंगल दोष के कुप्रभाव को मनीषियों व ज्योतिर्विदों ने इतना महिमा मंडित किया है कि इस दोष के कारण कभी-कभी वर-कन्याओं को आजन्म कुंवारा/ कुंवारी ही रहना पड़ता है। जनमानस नहीं जानता कि मंगल दोष का परिहार जन्मकुंडली में स्वयंमेव हो जाता है।

अमूमन जन्म कुंडली में मंगल के 1,4,7,8,12 होने पर मंगल दोष होता है। जन्म पत्रिका में जिन पांच स्थानों से मंगल दोष बनता है। यदि वहां मंगल के साथ चन्द्रमा, गुरु, शनि हो तो मांगलिक दोष स्वयमेव समाप्त हो जाता है, साथ ही मंगल को शनि 3,7,10 वीं पूर्ण दृष्टि से देखता है तो मंगल दोष नहीं रहता है।

जन्म कुंडली के केन्द्र स्थान 1,4,7,10 या 9,5 में चन्द्रमा अथवा गुरु हो तो बिल्कुल भी मंगल दोष नहीं रहता है। साथ ही जन्म पत्रिका के छठे या ग्यारहवें स्थान पर राहु होते मांगलिक दोष स्वयमेव समाप्त हो जाता है।

लग्न अनुसार मंगली दोष

मेष लग्न को मंगल दोष नहीं रहता है, वृषभ लग्न को 1, मिथुन लग्न को 7, कर्क लग्न को 8, सिंह लग्न को मंगल दोष नहीं रहता है, कन्या लग्न को 1,4,7 तुला लग्न को 1,12 वृष्चिक लग्न को 8, धनु लग्न को 1,4, मकर लग्न को 12, कुम्भ लग्न को 1 , मीन लग्न को 1,4,7,12 में मंगल दोष नहीं रहता है।

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